शिमला। राजधानी में सफाई व्यवस्था ठप हो गई है। करोड़ों रुपये की स्वीपिंग मशीनों से नगर निगम शहर का मालरोड तो चमका रहा है, लेकिन शहर की सड़कें, जंगल और नाले कचरे से भर गए हैं।
हालत यह है कि कार्ट रोड की पहाड़ियां कचरे से बदसूरत हो गई हैं। मेट्रोपोल पार्किंग के नीचे पहाड़ी कचरे से भर गई है। उधर, नगर निगम सर्कुलर रोड पर किल्टे लगाकर सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे कर रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि ये किल्टे कई दिन से खाली पड़े हैं। जिनमें कचरा भरा था, उसे बंदरों ने बिखेर दिया है। निगम ने पहाड़ियों से सफाई के लिए लाखों रुपये की मशीन भी खरीद रखी है लेकिन यह महीनों से खड़ी है। शहर के भट्ठाकुफर, पंथाघाटी, कृष्णानगर, कच्चीघाटी, रुल्दूभट्ठा समेत कई वार्डाें में सफाई व्यवस्था ठप हो गई है। कनलोग के जंगल कचरे से भर गए हैं। इस पर अब नगर निगम के पूर्व पार्षदों ने भी सवाल उठा दिए हैं। भट्ठाकुफर से पूर्व पार्षद नरेंद्र ठाकुर का कहना है कि उनके वार्ड में कचरे के ढेर लग गए हैं। शिकायतों के बावजूद निगम व्यवस्था दुरुस्त नहीं करवा रहा। सेनेटरी इंस्पेक्टर की जगह अब सफाई व्यवस्था का जिम्मा दूसरे कर्मचारियों को दे दिया है। लोअर पंथाघाटी में भी कचरे के पहाड़ खड़े हो रहे हैं।
दोपहर बाद उठ रहा कूड़ा, बंदरों का आतंक
सैहब सोसायटी के कर्मचारी सुबह दस बजे से पहले ही घरों से कूड़ा उठाकर कलेक्शन प्वाइंट पर रख देते हैं। लेकिन कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां दोपहर बाद जाकर मौके पर पहुंच रही हैं। तब तक यह कचरा बंदर और कुत्ते सड़क पर बिखेर रहे हैं। इससे लावारिस कुत्तों और बंदरों का आतंक भी बढ़ गया है।