नूरपुर(कांगड़ा)। क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र जाच्छ में बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि और बागवानी की ओर से चल रहा पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुक्रवार को संपन्न हो गया। इस दौरान क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के सह निदेशक डॉ. विपिन गुलेरिया ने बताया कि जाच्छ में जल्द ही एक बांस बायोचार प्लांट शुरू होने वाला है, जिससे किसानों को अपनी उपज का अच्छा दाम मिलने में मदद मिलेगी। भारत के पास विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बांस का आनुवंशिक भंडार है। इसमें 22 बांस और 136 से अधिक प्रजातियां शामिल हैं। इनमें से 11 प्रजातियां विदेशी मूल की है। हालांकि हिमाचल प्रदेश में बांस के अंतर्गत बहुत कम क्षेत्र आता है, जो राज्य के कुल भू-भाग का लगभग तीन प्रतिशत हैं। संवाद