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अभिमानी मनुष्य भक्तिमार्ग में कभी प्रगति नहीं कर सकता : पंडित सुमित

Fri, 16 May 2025 12:44 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
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परागपुर के समीप हार के नीलकंठ महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा मेंउप​स्थित संगत। स्रोत - फोटो : mathura
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परागपुर(कांगड़ा)। परागपुर के समीप हार के नीलकंठ महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर कथावाचक पंडित सुमित शास्त्री ने कहा कि अभिमानी मनुष्य भक्तिमार्ग में कभी प्रगति नहीं कर सकता। गजेंद्र मोक्ष प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि त्रिकूट पर्वत पर रहने वाले गजराज को अपने बल और परिवार पर अभिमान था। एक दिन सरोवर में स्नान के दौरान ग्राह ने उसका पैर पकड़ लिया। गजराज और उसका परिवार उसे छुड़ा न सके, तब वैराग्य की अवस्था में गजराज ने पूर्वजन्म की स्मृति से भगवान नारायण की स्तुति की। प्रभु ने सुदर्शन चक्र से ग्राह का मुख फाड़कर गजराज को मुक्त किया। यह कथा भक्तों को अभिमान त्यागकर भगवान की शरण में आने की प्रेरणा देती है। इसके अलावा उन्होंने समुद्र मंथन, बलि-वामन चरित्र, मत्स्य अवतार, भगवान श्रीराम की वंशावली और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथाएं भी सुनाई।
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