फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kangra News: गेहूं की फसल को खरपतवारों से बचाने के लिए करें दवाई का छिड़काव

विज्ञापन
विज्ञापन
पालमपुर (कांगड़ा)। कृषि और पशु पालन वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि प्रदेश के निचले क्षेत्रों में गेहूं के खरपतवारों में 2-3 पत्तियां आ गई हों, तो दवाइयों का छिड़काव करें। वेस्टा 16 ग्राम प्रति 30 लीटर पानी या क्लोडिनाफॉप की 24 ग्राम (10 डब्ल्यूपी) या 16 ग्राम (15 डब्ल्यूपी) व 2, 4-डी की 50 ग्राम मात्रा तीस लीटर पानी में घोलकर प्रति कनाल की दर से छिड़काव करें। 2,4-डी का छिड़काव क्लोडिनाफॉप के छिड़काव के 2-3 दिन के बाद करें। गेहूं के साथ चौड़ी पत्ती वाली फसल जैसे सरसों आदि की खेती की गई हो तो 2,4-डी रसायन का प्रयोग कभी न करें। कृषि विवि के प्रसार शिक्षा के निदेशालय निदेशक डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि किसान गेहूं की फसल में पीला रतुआ बीमारी को लेकर सचेत रहें। इस रोग में गेहूं के पत्तों पर पीले रंग के छोटे-छोटे दाने सीधी धारिओं में प्रकट होते हैं व दूसरी और पत्तों में धारीदार पीलापन दिखाई देता है। लक्षणों को देखते ही गेहूं की फसल में टिलट (प्रापिकोनाजोल) 25 ईसी या फोलीकर (टैवुकोनाजोल) 25 ईसी या बेलाटॉन 25 डब्ल्यू पी का 0.1 प्रतिशत घोल यानी 30 मिली दवाई 30 लीटर पानी में घोलकर प्रति कनाल की दर से छिड़काव करें व 15 दिन के बाद यह फिर से करें। साथ ही सब्जियों फूलगोभी, बंदगोभी, ब्रॉकली, चाइनीज बंदगोभी, पालक, मेथी, मटर व लहसुन आदि की निराई-गुड़ाई कर मात्रा के हिसाब से यूरिया खेतों में डालेें। पशुओं को ठंड से बचाव के लिए उचित प्रबंध करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें