नूरपुर (कांगड़ा)। उपमंडल नूरपुर के तहत गांव जौंटा के राकेश सिंह और धार भगूड़ी के तरसेम सिंह भी ईराक में फंसे उन 231 युवकों में शामिल हैं, जो वहां की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी करने गए हैं। लेकिन, उनके पास न तो पासपोर्ट है और न ही अपने वतन वापस लौटने के लिए पैसे। इसके चलते युवक घर वापसी के लिए तड़प रहे हैं। जौंटा निवासी राकेश सिंह के पिता बलदेव सिंह ने बताया कि करीब दो माह पहले उनका बेटा राकेश ईराक में मरमरा इंजीनियरिंग एवं कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी करने गया था। हालांकि, कुछ दिन पहले उनका राकेश से किसी अन्य साथी के जरिए मोबाइल से संपर्क था, लेकिन ईराक में हालात बिगड़ने के बाद से उनका राकेश से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। हालांकि, राकेश की ओर से फेसबुक के माध्यम से भेजे संदेशों से उसकी सलामती की खबर मिली थी। इन संदेशों में वहां फंसे युवक ईराक से सुरक्षित बाहर निकाले जाने की गुहार लगा रहे हैं। राकेश सिंह के पिता बलदेव सिंह के मुताबिक उनके बेटे राकेश व उसके अन्य साथियों के पासपोर्ट कंपनी ने अपने कब्जे में ले लिए हैं और उन्हें वेतन भी नहीं मिल रहा। उन्होंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से कुछ दिन पहले ईराक में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने का आश्वासन दिया था, मगर आज तक इसके बारे में कोई संजीदा प्रयास नहीं हुए। उन्होंने कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के सांसद शांता कुमार व प्रदेश सरकार से ईराक में फंसे युवाओं को सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई है।
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