धर्मशाला। देश के पहले प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिवस 14 नवंबर को हर साल बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन इस बार शिक्षा विभाग शायद बाल दिवस को महत्व देना भूल गया। प्रदेश के स्कूलों में छुट्टियों के चलते इस बार बाल दिवस नहीं मनाया गया। दिवाली की छुट्टियों के चलते प्रदेश शिक्षा विभाग और बच्चों के प्रिय माने जाने वाले चाचा नेहरू के जन्मदिवस को भूल गया। हालांकि शिक्षा विभाग ने देश के पहले शिक्षा मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी मौलाना आजाद अबुल कलाम का जन्मदिवस रविवार के दिन भी धूमधाम से मनाया। प्रदेश के किसी भी सरकारी स्कूल ने बाल दिवस नहीं मनाया गया। वहीं, शिक्षा विभाग की भी इसमें कुछ ज्यादा रुचि नहीं दिखी। देश को आजाद करने में अहम योगदान निभाने वाले पंडित जवाहर लाल नेहरू के बलिदान को शायद जनमानस भूलता जा रहा है। वहीं, इस बारे में उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक दिनकर बुराथोकी का कहना है कि अवकाश होने के चलते विभाग ने बाल दिवस नहीं मनाया। इसके अलावा इस बारे में कोई विशेष आदेश भी नहीं थे। इसके चलते प्रदेश के स्कूलों में इस बार बाल दिवस नहीं मनाया गया, लेकिन ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब स्वतंत्रता सेनानियों की मात्र प्रतिमाएं ही लगी रह जाएंगी और इनका महत्व और उनके बारे में आगामी पीढ़ी को शायद ज्ञात ही नहीं हो पाएगा। उन्होंने भी माना कि कुछ एक निजी संस्थानों को छोड़कर किसी भी सरकारी अथवा गैर सरकारी संस्थान या स्कूल ने बाल दिवस नहीं मनाया।