ूरपुर (कांगड़ा)। सालभर खेतों में हाड़तोड़ मेहनत करने वाले किसानों को एक बार फिर से मौसम की बेरुखी की चिंता सताने लगी है। दरअसल, जिला कांगड़ा के निचले मैदानी और असिंचित इलाकों में बारिश नहीं होने से किसानों को सूखे की मार झेलनी पड़ रही है। आमतौर पर रबी सीजन की फसलों गेहूं, जौ और चने की दाल की बुआई के लिए 15 नवंबर तक समय उपयुक्त माना जाता है। लेकिन जिले के मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के इंतजार में गेहूं की बिजाई लेट हो रही है। इससे बारिश के इंतजार में आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें झलकने लगी हैं। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो रबी फसलों की बुआई के लिए यह उपयुक्त समय है और मैदानी तथा मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के किसान अगेती किस्मों को बीज सकते हैं। हालांकि, मौसम में आए बदलाव से ठंड ने दस्तक दे दी है, लेकिन बारिश के इंतजार में अधिकांश असिंचित क्षेत्रों में छोटे और मझोले किसानों ने अभी तक गेहूं की बिजाई शुरू नहीं की है। जबकि कांगड़ा जिले के निचले इलाकों नूरपुर, जवाली, फतेहपुर, गंगथ, मंड, इंदौरा क्षेत्र में गेहूं और मक्की की पैदावार के लिए अग्रणी माने जाते हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले के करीब 2 लाख 35 हजार कृषक परिवारों की रोजी-रोटी खेतीबाड़ी पर निर्भर करती है। जिले के कुल क्षेत्रफल 5 लाख 77 हजार 971 हेक्टेयर क्षेत्र में से एक लाख 27 हजार 187 हेक्टेयर भूमि में खेती होती है। इसमें करीब 94500 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की पैदावार होती है। लेकिन जिले में कुल कृषि योग्य भूमि में से सिर्फ 33 हजार हेक्टेयर भूमि में ही सिंचाई सुविधा होने के कारण ज्यादातर किसानों को फसलों की पैदावार के लिए बारिश के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय किसानों राय सिंह, सुभाष सिंह, बलबीर सिंह, विचित्र सिंह, विक्रम जंबाल, मुकेश शर्मा, करनैल सिंह, बाबू राम, रतन चंद, सुभाष चंद इत्यादि का कहना है कि निचले मैदानी इलाकों में ज्यादातर खेतीबाड़ी बारिश के पानी पर निर्भर रहती है और इस समय असिंचित क्षेत्रों में ज्यादातर किसान रबी फसलों की बुआई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जिससे गेहूं की बुआई लेट हो रही है और आने वाले कुछ दिन तक यह सिलसिला यूं ही चलता रहा तो इसका फसल के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।