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नूरपुर की ऐतिहासिक धरोहरों को कौन संभाले?

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नूरपुर(कांगड़ा)।
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देवभूमि हिमाचल के प्रवेशद्वार पर बसा नूरपुर ऐतिहासिक नगर होने के बावजूद अभी तक पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं हो पाया है। जहां एक तरफ जिला कांगड़ा के बज्रेश्वरी मंदिर, ज्वालाजी और चामुंडा जैसे धार्मिक स्थलों को विकसित करने के लिए जहां प्रदेश सरकार ने भरसक प्रयास किए हैं वहीं नूरपुर के ऐतिहासिक किले और इसके भीतर श्री बृजराज स्वामी मंदिर अपने विलक्षण इतिहास के बावजूद अभी तक पर्यटकों की चहल-कदमी से दूर है। हालांकि, गाहे-गबाहे दोनों ही सियासी दलों के नेता नूरजहां के नाम से मशहूर नूरपुर को पर्यटन मानचित्र पर उभारने के वायदे तो करते रहे हैं, लेकिन इसे हकीकत में धरातल पर उतराने के लिए अभी तक कोई भी कारगर नीति नहीं बन पाई है। पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर टिलेनुमा स्थान पर बसे इस ऐतिहासिक नगर को प्राचीनकाल में धमड़ी के नाम से जाना जाता था। धमड़ी से इसका नाम बदलकर नूरपुर कैसे पड़ा, इसके पीछे एक रोचक कथा है। वहीं, नूरपुर किले में स्थित श्री बृजराज स्वामी मंदिर पूरे भारत वर्ष का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान श्री कृष्ण के साथ मीरा की मूर्ति एक साथ स्थापित है। इसके बावजूद मंदिर के विकास को आज दिन तक महत्ता नहीं दी गई। जबकि पुरातत्व विभाग की ओर से भी किले को पुरानी रंगत में ढालने और रखरखाव के अलावा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कोई खास पहल नहीं हो सकी है। नगर के ऐतिहासिक विशेषर तालाब के जीर्णोद्धार की बात करें तो नूरपुर नगर परिषद ने सालों पहले इसके सौंदर्यीकरण और म्यूजिकल फांउटेन लगाने की योजना बनाई थी, जो सरकारी फाइलों से आगे नहीं सरक पाई। इसी कड़ी में पूर्व धूमल सरकार में पर्यटन विभाग ने नूरपुर किले को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए किले में एल्यूमिनेशन लाइट लगवाने का एक महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट तैयार किया था। इसके लिए पर्यटन विभाग ने बाकायदा इच्छुक पार्टियों (व्यक्तिगत/फर्म/कंपनियों) से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट भी मंगवाए थे, लेकिन यह कवायद भी सिरे नहीं चढ़ पाई। जहां तक कि पुरातत्व विभाग ने भी किले के सौंदर्यीकरण, लाइट एंड साउंड योजना और इसकी चहारदीवारी करवाकर इसे शुल्क के दायरे में लाने की योजना भी बनाई थी, लेकिन किले के भीतर चल रहे स्कूल के बाहर शिफ्ट न होने के चलते इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उधर, पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नूरपुर किले को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं। अगर किले के भीतर स्थित स्कूल को अन्यत्र शिफ्ट किया जाता है तो इसे संवारने की योजना को धरातल पर अमलीजामा पहनाया जा सकता है।
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