अमर उजाला ब्यूरो
जवाली (कांगड़ा)। पौंग बांध विस्थापित समिति की बैठक जवाली के विश्रामगृह में हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के प्रदेश अध्यक्ष हंसराज चौधरी ने की। सबसे पहले पौंग बांध विस्थापितों की समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद आगामी रणनीति तैयार की गई। हंसराज चौधरी ने कहा कि पौंग बांध निर्माण के समय लोगों की जमीनों की बलि दी गई। उस समय हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सरकार ने समझौता किया था कि विस्थापितों को श्रीगंगानगर में रिहायशी जमीन दी जाएगी। इसमें हर मूलभूत सुविधा मुहैया होगी, लेकिन आज तक कुछ ही परिवारों को राजस्थान में मुरब्बे अलॉट हो सके हैं। वे भी ऐसी जगह पर अलॉट हुए, जहां पर लोगों को कोई मूलभूत सुविधा नसीब नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सरकार ने जिन जगहों पर विस्थापितों को जमीन दी है, वह बार्डर एरिया के साथ है, जहां तक पहुंचने के लिए पहले अनुमति लेनी पड़ती है। दूर-दूर तक न तो सड़क और न ही स्कूल, कालेज सहित अस्पताल की कोई सुविधा मिलती है। मुरब्बों को सिंचित करने के लिए पानी की भी कोई सुविधा नहीं है। वर्ष 1971 में विस्थापन का शिकार हुए विस्थापित आज भी इसका दंश झेल रहे हैं। जो झूठे केस राजस्थान में विस्थापितों के खिलाफ दर्ज हैं, उन्हें तुरंत वापस करवाया जाए। पूर्व की कांग्रेस सरकार के समक्ष भी पौंग बांध विस्थापितों ने अपनी मांगों को कई बार मंत्रियों व विधायकों के माध्यम से उठाया, लेकिन आश्वासनों के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो पाया। पौंग डैम निर्माण के समय अनाउंसमेंट की गई थी कि विस्थापितों को जहां भी खाली जगह मिलती है, वहां जाकर बस जाओ, जिसके चलते विस्थापित जहां भी खाली जगह मिली वहां पर जाकर बस गए लेकिन अब सरकारें वन विभाग की भूमि दर्शाकर उनके रिहायशी मकानों को गिराने पर उतारू हैं। पौंग बांध विस्थापित समिति के प्रदेशाध्यक्ष हंसराज चौधरी ने कहा कि अब केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी हैं। ऐसे में विस्थापितों की लंबित मांगों के शीघ्र पूरा होने की उम्मीद है। पौंग बांध विस्थापित समिति का प्रतिनिधिमंडल नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया के नेतृत्व में 11 जनवरी को तपोवन में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिलकर अपनी मांगों के बारे में उन्हें अवगत करवाएगा। इस मौके पर हुकम चंद गुलेरी, आरपी वर्मा, प्यारे लाल, साहिब सिंह, मदन मोहन, अश्विनी कुमार, सुरेश कुमार, रमेश चंद कौंडल, गुलजीरी लाल, करनैल सिंह सहित सैकड़ों विस्थापितों ने भाग लिया।