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पौंग झील में प्रवासी पक्षियों ने जमाया डेरा

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फतेहपुर (कांगड़ा)। पिछले दो महीनों से क्षेत्र के किसान वर्षा न होने से परेशान हैं लेकिन हजारों मील का सफर तय कर आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए बारिश न होने से पौंग झील स्वर्ग बनी हुई है। हजारों एकड़ खाली पड़े पौंग झील क्षेत्र में फतेहपुर, धमेटा, खटियाड़, सिद्धाथा, ज्वाली, हरसर, नगरोटा सूरियां, देहरा, हरिपुर क्षेत्रों की सैकड़ों पंचायतों के किसान गेहूं, जौ और सरसों की फसलों की बिजाई करते हैं। प्रवासी पक्षियों से फसलों की रखवाली के लिए किसान अस्थायी तंबू लगाकर रहते हैं, जिससे ये पक्षी झील के समीप थोड़ी से खाली क्षेत्र में जैसे-तैसे अपना प्रवास पूरा करते हैं। बारिश न होने से हजारों एकड़ भूमि पर हल नहीं चल पाया है। किसानों की परेशानी के बावजूद बारिश न होना प्रवासी पक्षियों के लिए वरदान से कम नहीं है। पक्षियों के झुंड पौंग झील के खाली क्षेत्र में विचरण करते पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। अब ये पक्षी मुख्य सड़कों से ही देखे जा सकते हैं। एक अनुमान के अनुसार प्रवासी पक्षियों की संख्या अब तक 70 से 80 हजार के करीब पहुंच चुकी है। बाइल्ड लाइफ विभाग शीघ्र इनकी गिनती करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पौंग डैम झील में गत वर्ष 76 प्रजातियों के एक लाख प्रवासी पक्षी आए थे, जिनमें बारहिडगीज, कॉमन कुट्स, पिंटैन, कोस स्टीन और लिटिल नामक प्रवासी पक्षी पौंग डैम झील में आये थे और कुछ खास किस्म के पक्षी भी आए थे जो झील में पहली बार आए थे। इनमें जिनमें वाटररेल, ब्राउनक्रोक, जेक नाइट, सारस क्रेन ब्लैक ब्लेड फ्ऱिन कॉमन पोचर्ड, बारहेडेड गीज, रूडी शेल डक प्रजातियां इनमें शामिल थीं। वहीं, नोबल कम्यूनिटी संस्था ने पर्यटकों को आकर्षित करने की पहल कर दी है। अगर कोई परिवार या ग्रुप में पौंग झील में भ्रमण करना चाहता है तो संस्था बाइल्ड लाइफ, स्थानीय पुलिस और स्थानीय प्रशासन से अनुमति की औपचारिकताएं निशुल्क करवाएगी। संस्था के अध्यक्ष मंगल सिंह ने बताया कि उनकी संस्था इस क्षेत्र को पर्यटन के क्षेत्र में उभारने को प्रयासरत है। उन्होंने स्थानीय पंचायतों, महिला मंडलों, युवक मंडलों व संस्थाओं से आग्रह किया है कि जगह-जगह पौंग झील की सुंदरता व प्रवासी पक्षियों की अठखेलियों का प्रचार किया जाए। इससे जहां से प्रतिदिन पंजाब, हरियाणा, दिल्ली व जम्मू-कश्मीर के सैकड़ों पर्यटकों को जानकारी मिलेगी और पर्यटन बढे़गा।
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