निजी स्कूल संचालकों की मनमानी पर लगे अंकुश
नियमों को दरकिनार करने का लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
जवाली (कांगड़ा)। प्रदेश सरकार भले ही निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने के दावे कर रही है, लेकिन हकीकत में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने में कामयाब नहीं हो पा रही है। नए शैक्षणिक सत्र के लिए दाखिले शुरू हो गए हैं। निजी स्कूल के संचालक स्टाफ को साथ लेकर घर-घर दस्तक दे रहे हैं तथा पोस्टर इत्यादि के माध्यम से भी लोगों को निजी स्कूलों की उपलब्धियां गिनवा रहे हैं। निजी स्कूलों में शिक्षा विभाग के निर्देशों को ठेंगा दिखाकर हर कक्षा में एडमिशन फीस ली जा रही है। हर साल कक्षाओं में फीस में भारी बढ़ोतरी की जा रही है। इसी के साथ निजी स्कूलों में वर्दियां, जूते और किताबें-कॉपियां बेच रहे हैं। शिक्षा विभाग के मापदंडों के मुताबिक किताबें न लगाकर प्राइवेट प्रकाशनों की किताबें पढ़ाई जाती हैं, क्योंकि प्राइवेट प्रकाशन से निजी स्कूलों को इस पर मोटी कमीशन दी जाती है। नियमों को दरकिनार करके निजी वाहनों को हायर करके बच्चों को स्कूल से घर तथा घर से स्कूल लाया जाता है। वार्षिकोत्सव के नाम पर भी 500 से 1000 रुपये तक ऐंठे जाते हैं। प्राइवेट स्कूलों में आग बुझाने के यंत्र भी नहीं है और अगर हैं तो उनको समय-समय पर भरवाने की बजाय मात्र चिट लगाकर ही काम चलाया जा रहा है। अधिकतर स्कूल संचालकों ने करोड़ों के स्कूल भवन बना रखे हैं, जबकि सरकार और शिक्षा विभाग की आंखों में धूल झोंककर नो लॉस नो प्रॉफिट दर्शाया जाता है। स्कूलों के पास खेल मैदान नहीं हैं। प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है। कागजों में दस्तावेज किसी के लगाए जाते हैं और स्कूल में पढ़ाई कोई करवा रहा होता है। उधर, इसके बारे में शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि निजी स्कूलों की मनमर्जी पर लगाम कसी जाएगी। किसी भी सूरत में निजी स्कूलों की मनमर्जी नहीं चलने दी जाएगी। निजी स्कूलों की चेकिंग की जाएगी तथा अगर कोई स्कूल नियमों को दरकिनार करके चलता पाया गया तो उसकी मान्यता को रद्द किया जाएगा