अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। तपोवन विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान की पोल खुली। विधानसभा परिसर के गेट नंबर-दो के बाहर लोगों के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। लोगों को मजबूरी में खुले में लघुशंका और दीर्घशंका के लिए जाना पड़ा, जो जिला प्रशासन की नाकामियों को उजागर करता है। तीन महीने पहले ही केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने ग्रामीण स्वच्छता के लिए देशभर में अव्वल जिला का पुरस्कार मिला है, लेकिन शीतकालीन सत्र के दौरान गेट के बाहर लोगों के लिए मोबाइल शौचालय का भी प्रशासन प्रबंध नहीं कर पाया। विस सत्र के पहले दिन भीड़ अधिक होने के कारण लोग खुले में शौच करते दिखे। विधानसभा के गेट नंबर दो से मुख्यमंत्री, केबिनेट मंत्र नहीं आते हैं। इस गेट से सिर्फ विधायक और आम जनता का आना जाना रहता है, जिसमें सबसे ज्यादा समस्याओं को लेकर सरकार के नुमाइंदों से मिलने आए लोगों को उठानी पड़ती है, जो सुबह से शाम तक उसी स्थान पर खड़े होते हैं। महिलाओं और पुरुष दोनों को इस समस्या से जूझना पड़ा।