गंजू के बाग में बही प्रवचनों की अमृतधारा
रामकथा के चौथे दिन मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं को किया निहाल
अमर उजाला ब्यूरो
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। गंजू के बाग में आयोजित रामकथा के चौथे दिन मंत्रोच्चारण के साथ मुरारी बापू ने सबसे पहले वंदना की। इस दौरान उन्होंने हनुमान और सीया-राम के भजनों से श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। पंडाल में मौजूद लोगों ने बापू के प्रवचनों को मोबाइल में रिकॉर्ड भी किया। मोरारी बापू ने कहा कि जिस प्रकार दिव्य दृष्टि हर किसी को नहीं मिलती है, ठीक उसी तरह श्रीराम की भक्ति भी हर किसी को नहीं मिलती। उन्होंने अपने शेयरो शायरी के अंदाज में कहा ‘मैं तुम्हे और क्या दूं इस दिल के सिवा’ अर्थात उस प्रभु श्रीराम को हम अपने दिल के सिवा और क्या दे सकते हैं। एक शेयर का मतलब समझाते हुए उन्होंने कहा, उलझनों में उलझ कर रह गए जो आये थे तेरी जुल्फों की उलझनों को सुलझाने। अर्थात इस प्रभु भक्ति के रहस्य को जानने के लिए जो भी बुद्धिजीवी गया, वह उलझ कर रह गया पर उसका नाम प्रभु राम के नाम के साथ हुआ है। एक गीत के बोल गुनगुनाते हुए बापू ने कहा कि दिल विल प्यार व्यार में क्या जानूं रे, जानूं तो मैं जानूं बस इतना जानूं मैं तुझे अपना मानूं रे अर्थात प्रभु श्रीराम को अपना मानना ही भक्ति है और समर्पण की भावना ही प्रभु के नजदीक ले जाती है। बापू ने कहा कि मोह रूपी रावण को राम ने मारा था। हमारे भीतर महामोह का महिषासुर बैठा है। महिषासुर का वध राम ने नहीं मां काली ने किया था। इसे मारने के लिए हम रामकथा का सहारा लें।