फतेहपुर (कांगड़ा)। प्राकृतिक खेती और मोटा अनाज सिर्फ किसानों की आमदनी का जरिया नहीं बन रहे हैं, बल्कि यह क्षेत्रीय परंपरा को भी नई पहचान दे रहे हैं। कम लागत, बेहतर उत्पादन और पोषक तत्वों से भरपूर ये फसलें मिट्टी की सेहत और जल संरक्षण में भी मदद कर रही हैं। किसानों की यह पहल उपभोक्ताओं के लिए शुद्ध और पोषक भोजन की नई उम्मीद लेकर आई है। फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र के करीब 124 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं। आत्मा परियोजना के कृषि प्रसार अधिकारी विशाल शर्मा ने बताया कि कम पानी और उर्वरक में भी ये फसलें उगती हैं और पोषण में भरपूर हैं। मक्की, गेहूं, हल्दी, बाजरा, रागी और जौ जैसी फसलें बच्चों और महिलाओं के लिए जरूरी कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व प्रदान करती हैं। सरकार ने प्राकृतिक खेती के माध्यम से उगाई गई मक्की के लिए 40 रुपये प्रति किलो, गेहूं के लिए 60 रुपये, कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये और पांगी क्षेत्र में उगाई गई जौ के लिए 60 रुपये प्रति किलो न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। किसान इन फसलों से आटा, कुकीज और दलिया बनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। संवाद