पालमपुर(कांगड़ा)। सीएसआईआर हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर में एक चाय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके लिए किसानों को उजड़े चाय बागानों का विकास, चाय बागानों के मशीनीकरण एवं औषधीय और सगंध पौधों की खेती पर जागरूक किया गया। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. आरके सूद वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक ने कहा कि चाय उन फसलों में से एक है जो न केवल जलवायु परिवर्तन, बंदरों और जंगली जानवरों के प्रकोप तथा मौसम की मार के नुकसान से बचाती है, बल्कि अच्छा लाभ भी देती है, लेकिन अच्छा लाभ तभी मिलेगा, जब बागों का प्रबंध और चाय की गुणवत्ता उच्च स्तर की होगी। बागानों में श्रमिकों की कमी और अधिक लागत की समस्या का समाधान केवल मशीनीकरण से ही संभव है। उन्होंने यह भी बताया कि चाय उत्पादक अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए अपने खाली पड़ी जमीन में सुगंध फसलें जैसे जंगली गेंदा, सगंध गुलाब, मुशकवाला जैसी फसलें उगा कर अपना मुनाफा दोगना कर सकते हैं। संस्थान के चाय अनुसंधान फार्म में करीब 25 लघु और सीमांत चाय बागान मालिकों को उजाड़ पड़े बागानों का प्रबंधन और चाय फार्म का मशीनीकरण विषय पर प्रशिक्षण दिया। चाय उत्पादकों को सुगंध फसलों के बारे में भी जानकारी दी। इस समय प्रदेश में करीब 12 हजार हेक्टेयर चाय बागान उजाड़ पड़े हैे। इस प्रशिक्षण में बैजनाथ, सुलह, राजपुर टांडा, बंड बिहार, चढ़ियार, चौंतड़ा, जोगेंद्रनगर क्षेत्रों के किसानों ने भाग लिया ।