हमीरपुर। जिले में मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ने लगे हैं। अधिकतर युवा ही इसकी चपेट में आ रहे हैं। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में रोजाना तनाव से पीड़ित 30 से 40 लोग इलाज करवाने के लिए पहुुंच रहे हैं। इसका बड़ा कारण नशे का सेवन बताया जा रहा है। इससे सबसे ज्यादा 15 से 30 आयु वर्ग के युवा प्रभावित हो रहे हैं।
तनाव से व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आते हैं। अकसर व्यक्ति अकेले में बात करता है। अधिक लोगों से बातचीत नहीं करता और अधिक गुस्सा आदि करता है। वहीं, तनाव और चिंता के लक्षण स्किजोफ्रेनिया (मनोविकार) नामक बीमारी में भी पाए जाते हैं। स्किजोफ्रेनिया दिमाग की एक ऐसी बीमारी है जो किसी व्यक्ति में मानसिक विकार का वर्णन करता है। इसमें कुछ मरीज एक तरह की काल्पनिक दुनिया या भ्रम की स्थिति में रहते हैं। उनका नजरिया वास्तविक दुनिया से अलग होता है।
अस्पताल में हर माह 30 से 40 लोग मनोवैज्ञानिक विभाग में इलाज करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं, युवाओं में नशे के कारण यह बीमारी देखने को मिल रही है। इस संदर्भ में मनोवैज्ञानिक चिकित्सक डॉ. संदीप ने कहा कि अस्पताल में डिप्रेशन व एंग्जायटी के एक दिन में करीब 30 से 40 मरीज पहुंच रहे हैं। इसके कई कारण होते हैं। कई बार पारिवारिक, सामाजिक, स्वास्थ्य से संबंंधी बीमारियों और नशे के कारण तनाव और चिंता होती है। कई मरीजों में आनुवांशिक कारणों से समस्या होती है। लेकिन, युवाओं में नशे के कारण यह समस्या बढ़ रही है। उन्होंने लोगों से पौष्टिक चीजों का सेवन, योग करने, नशे से दूर रहने और समस्या आने पर अस्पताल में इलाज करवाने की सलाह दी है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि नशे के कारण युवाओं को खासी दिक्कत हो रही है। उनके स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है तथा मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए नशे से दूर रहें।