रंगस(हमीरपुर)। ग्राम पंचायत जोलसप्पड़ के पंचायत सचिव ने थाईं गांव की वन अधिकार समिति की बैठक वार्ड सदस्य के घर में वीरवार को आयोजित की। बैठक के दौरान सचिव ने निर्माणाधीन डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज के लिए अधिगृहित होने वाली अतिरिक्त भूमि के बारे में चर्चा प्रस्ताव रखा। इस दौरान गांव की वन अधिकार समिति के अध्यक्ष महेंद्र सिंह, विक्रम सिंह ठाकुर, मोहिंद्र, प्रदीप कुमार, वार्ड सदस्य पूनम और मंजू बाला आदि उपस्थित रहे। प्रस्ताव के ऊपर चर्चा करते हुए गांववासियों ने मेडिकल कॉलेज के लिए निजी मलकीयत भूमि सरकार को देने से साफ तौर पर मना कर दिया।
गांववासियों ने कहा कि गांव के बीच से निकलने वाले बाईपास के लिए सरकार ने पूर्व में किए सर्वे को अब रद्द करके दोबारा से नया सर्वे करवाना शुरू कर दिया है। इसके लिए बकायदा गांववासियों की बरानी अव्वल यानी कृषि योग्य भूमि सर्वे के अंतर्गत आ रही है इसके लिए गांववासी फिलहाल अभी तक तैयार हैं। लेकिन अब सरकार द्वारा मेडिकल कॉलेज के लिए गांववासियों की मलकीयत भूमि अतिरिक्त भूमि के रूप में लेने की मंशा जाहिर की है। इसके लिए गांववासी बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि अधिकतर गांववासियों के पास पहले से ही कृषि करने के लिए बहुत कम भूमि बची है और सरकारी जगह भी। यहां तक की कृषि करने योग्य भूमि बाईपास के लिए सर्वे के तहत जा रही है। इसके लिए अधिकतर गांववासी तैयार भी हैं। लेकिन दूसरी ओर अब मेडिकल कॉलेज के लिए अतिरिक्त भूमि लेने की सरकार की योजना के अनुसार इसी गांव के जमीदारों की मलकीयत भूमि लेने की योजना सरकार द्वारा बनाई जा रही है। चर्चा के दौरान सभी गांववासियों ने मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए मलकीयत भूमि देने से मना कर दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गत दिवस अपने विधानसभा क्षेत्र के प्रवास के दौरान मेडिकल कॉलेज के दौरे के अधिकारियों के साथ बैठक कर यह आदेश दिए थे कि साथ लगती करीब 50 कनाल भूमि का अधिग्रहण करके बनने वाले अस्पताल के दूसरे फेस का निर्माण करने की योजना पर काम किया जाए। पंचायत सचिव विनय सिंह पटियाल ने कहा कि बैठक के दौरान गांववासियों ने मलकीयत भूमि देने से इनकार किया है।