सुजानपुर (हमीरपुर)। विधानसभा क्षेत्र सुजानपुर के ऐतिहासिक चौगान में चल रहे राष्ट्र स्तरीय होली मेले में इस वर्ष मिट्टी के बर्तनों की केवल एक ही दुकान लगी है। मशीनी युग आने के कारण प्राचीन तकनीकों से तैयार होने वाले मिट्टी के बर्तनों की मांग लगातार खत्म हो जा रही है। इससे मिट्टी के बर्तन तैयार करने वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
राष्ट्र स्तरीय होले मेले में प्रत्येक वर्ष मिट्टी के बर्तन तैयार करने वाले लोग आजीविका कमाने के लिए मिट्टी के बर्तनों की दुकानें लगाते थे लेकिन बर्तनों की मांग में कमी आने के कारण अब इस वर्ष मेले में मिट्टी के बर्तनों की केवल एक ही दुकान लगी है।
मिट्टी से तैयार बर्तनों में घड़े, सुराही, घढ़ोलु, गुल्लक, दीपकों और खिलौनों का अपना महत्व है। यह बर्तन प्राकृति को बिना नुकसान पहुंचाए आसानी से रिसाइकल हो जाते हैं। इससे पर्यावरण को हानि भी नहीं पहुंचती। दूसरी ओर मिट्टी का घड़ा पानी के तापमान को सामान्य बनाए रखता है जिससे शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। घड़े का पानी शरीर में आयरन की कमी को दूर करता है लेकिन बर्तनों की घटती मांग के चलते बर्तन बनाने वाले परिवारों को भी काफी परेशानी हो रही है।
मशीनी युग के आने से हो रहा नुकसान
राष्ट्र स्तरीय होली मेले में मिट्टी के बर्तनों की दुकान लगाने वाले दुकानदार सतीश कुमार पिथा ने कहा कि हाथों से बनाए मिट्टी के बर्तनों का अपना ही महत्व है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार मिट्टी के बर्तनों का व्यवसाय करते थे जिसे उन्होंने भी कायम रखा है। उन्होंने कहा कि होली मेले के शुरू होने से छह माह पूर्व ही मिट्टी के बर्तनों को बनाने के प्रक्रिया शुरू कर देते है लेकिन मशीनी युग के आने से उन्हें काफी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।