लदरौर (हमीरपुर)। छत्रैल गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथाव्यास आचार्य अनिल शर्मा ने आत्म देव का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा आत्मदेव एक धनी ब्राह्मण थे जिनकी कोई संतान नहीं थी। वे अपनी पत्नी धुंधली के साथ रहते थे। एक दिन, आत्मदेव ने एक संत से संतान प्राप्ति के लिए आशीर्वाद मांगा और संत ने उन्हें फल दिया। आत्मदेव की पत्नी ने वह फल स्वयं न खाकर गाय को खिला दिया। बाद में गाय ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसके कान गाय के समान थे, इसलिए उसका नाम गोकर्ण रखा गया। कुछ समय बाद, आत्मदेव की पत्नी ने अपनी बहन के पुत्र को गोद लिया, जिसका नाम धुंधकारी रखा गया। आत्मदेव की कथा एक धार्मिक और नैतिक कहानी है जो हमें जीवन के विभिन्न पहलुओं, जैसे कि कर्म, प्रारब्ध और संतान के महत्व के बारे में सिखाती है। संवाद