मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में रोगियों को नहीं मिल रही दवा
बच्चों में पाई जाती है थैलेसीमिया बीमारी, लंबे समय से अस्पताल में नहीं आई दवाई
बीपी, शुगर, कैल्शियम का स्टॉक भी नहीं पहुुंचा, मरीजों को हो रही परेशानी
बाहर महंगे दामों पर दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर हैं मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में थैलेसीमिया बीमारी की दवाई नहीं मिल रही है। इससे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। थैलेसीमिया प्राय: बच्चों में पाए जाने वाली बीमारी है। यह एक वंशानुगत रक्त विकार है। इसमें शरीर में सामान्य से कम हीमोग्लोबिन होता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं को ऑक्सीजन ले जाने में सक्षम बनाता है। थैलेसीमिया एनीमिया का कारण बन सकता है, जिससे थकान अधिक होती है। थैलेसीमिया बीमारी के इलाज के लिए डेफेरासिरॉक्स दवाई दी जाती है। यह दवा रक्त में आयरन का इलाज करती है। हेमोक्रोमैटोसिस या आयरन ओवरलोड का इलाज करती है। लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने और कुछ हार्मोन बनाने में सहायता करती है तथा आयरन रक्त कोशिकाओं को ऑक्सीजन ले जाने में भी मदद करती है। यह दवाई कुछ समय पूर्व अस्पताल में आती थी लेकिन करीब छह माह से यह दवाई अस्पताल में उपलब्ध नहीं हो रही है। इससे बच्चों के अभिभावकों को निजी मेडिकल स्टोरों की ओर रुख करना पड़ रहा है। मेडिकल स्टोरों में 10 टेबलेट की कीमत 1500 से 2500 रुपये के करीब है। इससे अभिभावकों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। तीमारदारों नवीन, संजय, विजय, ममता, सुलोचना, कल्पना आदि ने कहा कि अस्पताल में कई दवाइयां नहीं मिल रही हैं। बाहर महंगे दामों पर दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। वहीं, अस्पताल में दो सप्ताह से बीपी, शुगर, कैल्शियम आदि की दवाइयां भी नहीं मिल पा रहीं हैं। इससे मरीज खासे परेशान हैं। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को हो रही है। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय शर्मा ने कहा कि ऑर्डर कर दिया गया है। ऑर्डर पहुंचते ही दवाइयां उपलब्ध करवा दी जाएंगी।