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एजेंडे पर बात करें, व्यर्थ की फिलॉसफी ने झाड़ें अधिकारी : अवस्थी

शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 16 Sep 2021 12:05 AM IST
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हमीरपुर। रोगी कल्याण समिति की बैठक में रखे गए एजेंडे पर बात करें और व्यर्थ की फिलॉसफी न झाड़ें अधिकारी। यह बात हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमिताभ अवस्थी ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन हमीरपुर के अधिकारियों को चेताते हुए कही। डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर की रोगी कल्याण समिति गवर्निंग बॉडी की बुधवार को आयोजित बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल के सामने ही मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्य अधिकारियों और समिति के सदस्यों के बीच जनहित के मुद्दे पर खूब नोकझोंक हुई। समिति के सदस्यों छत्तर सिंह चंदेल, सुमित ठाकुर, अजय शर्मा रिंटू और हरीश शर्मा ने स्वास्थ्य अधिकारियों की खिंचाई करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन का व्यवहार मरीजों और समिति सदस्यों के प्रति सही नहीं है।
कॉलेज में मनमर्जी से काम हो रहे हैं। अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन पिछले तीन सालों से खराब पड़ी है। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जब भी संपर्क करने की कोशिश की जाती है तो प्रिंसिपल फोन तक नहीं उठातीं। मेडिकल कॉलेज में पार्किंग की सुविधा न के बराबर है। कॉलेज के समीप आवासीय परिसर में 50 वाहनों को खड़ा करने की सुविधा है, लेकिन वहां गेट पर ताला लगा रखा है। अस्पताल के नजदीक जो निजी पार्किंग है, वहां पर गाड़ी मोड़ने के ही 50 रुपये वसूले जा रहे हैं। सड़क किनारे खाली जगह पर वाहन खड़ा करते हैं तो पुलिस भारी भरकम चालान कर देती है। मरीजों को यहां पर उचित सुविधाएं नहीं मिल रहीं और उन्हें टांडा और आईजीएमसी रेफर किया जा रहा है। विकास कार्यों, अस्पताल में दवाइयों व उपकरणों की खरीद और मोलतोल वार्ता में कभी भी समिति सदस्यों को न तो शामिल किया और न ही विश्वास में लिया गया।

स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने कहा कि जो भी मुद्दे इस बैठक में समिति सदस्यों की ओर से उठाए गए हैं, उन्हें बिना किसी देरी के सुलझाया जाए। बैठक में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से हस्तक्षेप कर रहे एक सीनियर स्वास्थ्य अधिकारी को स्वास्थ्य सचिव ने दो बार टोकते हुए कहा कि आपसे स्पष्टीकरण नहीं मांगा है, इसलिए आप चुपचाप बैठ जाएं। सचिव ने कहा कि बैठक में न तो एजेंडा क्लीयर है और न ही प्रस्ताव। समझ नहीं आ रहा कि बैठक में मेडिकल कॉलेज प्रशासन क्या कहना चाहता है। इसलिए जब भी बैठक में आएं, पूरी तैयारी के साथ आएं। सचिव ने चेतावनी देते हुए कहा कि फिजूल के बैंक अकाउंट न खोले जाएं। अगर किसी मरीज को बेवजह रेफर किया तो सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इस बैठक में अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चौहान की कार्यप्रणाली की प्रशंसा भी की गई। जबकि अन्य की कारगुजारी से स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव काफी नाराज नजर आए।
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