बड़सर (हमीरपुर)। छह वर्ष बीत जाने के बाद भी राजकीय महाविद्यालय बड़सर का दर्जा नहीं बढ़ पाया है। वर्ष 2017 में प्रदेश सरकार की ओर से महाविद्यालय का दर्जा बढाकर इसे स्नातकोत्तर करने की घोषणा की गई थी और तत्काल प्रभाव से यहां पर इतिहास, हिंदी और एम कॉम शुरू करने का भी निर्णय लिया गया था। छह वर्ष बाद भी कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए पीजी कक्षा की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है।
वर्तमान में चार अलग-अलग विषयों में प्राध्यापकों के पद रिक्त हैं। ऐसे में महाविद्यालय में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को काफी दिक्कत हो रही है। अभिभावकों सतीश कुमार, रमेश, प्रकाश, सुनीता, नीलम, सुखदेव आदि ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से आदेश पारित होने के बावजूद अभी तक कॉलेज में पीजी कक्षाएं लागू नहीं हो पाई हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर शिक्षा ग्रहण करने के लिए हमीरपुर, ऊना या अन्य जगह का रुख करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे विधानसभा क्षेत्र में किसी भी महाविद्यालय में पीजी कक्षाओं की सुविधा नहीं है। ऐसे में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को ऊना, हमीरपुर सहित अन्य निजी महाविद्यालयों में दाखिला लेना पड़ रहा है। अभिभावकों ने प्रदेश सरकार से बड़सर महाविद्यालय का दर्जा बढ़ाने की मांग की है।
इस बारे में कॉलेज के प्राचार्य अश्वनी कुमार ने कहा की इस विषय में सरकार को लिखकर जानकारी दी गई है। इस संदर्भ में सरकार ही अंतिम निर्णय ले सकती है। हालांकि इस विषय में बड़सर विधायक और एनएसयूआई के राष्ट्रीय संयोजक रूबल ठाकुर ने मुख्यमंत्री के समक्ष मामला उठाया है लेकिन अभी यह कह पाना मुश्किल है कि कब तक बड़सर महाविद्यालय में स्नातकोत्तर कक्षाएं शुरू हो पाएंगी। अगर कक्षाएं शुरू होती हैं तो यहां के छात्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।