डिडवीं टिक्कर(हमीरपुर)। कैहरवीं गांव में सुनाई जा रही श्रीमद्भागवत कथा में शुक्रवार को पंडित चंद्र कांत ने भक्तों को श्रीकृष्ण भगवान की उस लीला का वर्णन सुनाया जिसमें श्रीकृष्ण अपनी शरारतों के कारण माता यशोदा के हाथों उखल से बंध गए। माता ने कहा-अब करो शरारत, मैं भी देखती हूं कैसे करोगे। परंतु भगवान तो स्वयं बंधे थे क्योंकि उन्होंने तो दो गंधर्वों का उद्धार करना था. जो किसी ऋषि के श्राप के कारण वृक्ष बने थे। जब भगवान को माता यशोदा ने उखल से बांध दिया और वह स्वयं कामों में लग गई तो बालरूप श्रीकृष्ण घुटनों के बल चलते चलते उन दोनों वृक्षों के बीच पहुंचे और उनका उद्धार किया। महाराज ने कहा कि जिस-जिस ने भी भगवान का सच्चे मन से स्मरण किया, भगवान ने उसका कल्याण किया।