नेरी शोध संस्थान में प्रशिक्षु चित्रकारों की पेंटिंग का निरीक्षण करते मुख्यातिथि व अन्य।
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हमीरपुर। जलरंग कार्यशाला में रविवार को सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के उप-कुलपति डॉ. देवदत्त शर्मा ने कहा कि चित्रकार ग्रामीण क्षेत्र के इतिहास और संस्कृति को प्रदर्शित करता है और निश्चित तौर पर उस इतिहास को वर्षों तक अपनी कला के माध्यम से जीवित रखता है। कला हृदय को समय-समय पर बदलती रहती है और एक कलाकार अपनी कल्पना के साथ समाज की समस्या को भी समय-समय पर उजागर करता रहता है।
कला को अगर देखा जाए तो समय की स्थिति के साथ बदलती रहती है। जैसे एक पालकी में बैठी दुल्हन सामाजिक व्यवस्था को प्रदर्शित करती है, दूसरी तरफ एक झरोखे में बैठी रानी अपनी यादों की कल्पनाओं को बिखेरती है। इन सभी चीजों को लेकर कलाकार समय-समय पर अपनी कला का रूप प्रदर्शित करता रहता है। इससे पूर्व हमीरपुर के उप-मंडलाधिकारी मनीष सोनी ने कहा कि प्रशिक्षुओं ने इस कार्यशाला में जो चित्रकला प्रस्तुत की है, वह बहुत ही सराहनीय है। जलरंगों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के छायाचित्र प्रस्तुत किए हैं।
इन्हें निरंतर रूप से आगे बढ़ाना चाहिए। संस्थान को इस क्षेत्र में कार्यशाला समय-समय पर करनी चाहिए, ताकि कला प्रशिक्षुओं को बढ़ावा मिल सके। कार्यशाला संयोजक डॉ. विश्वेश्वरी तिवारी की ओर से त्रिदिवसीय कार्यशाला का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इसी के साथ ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी में त्रिगर्त अभ्युदय परिषद, हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी शिमला, संस्कार भारती हिमाचल व पंजाब और भाषा एवं संस्कृति विभाग हमीरपुर की ओर से आयोजित जलरंग कार्यशाला का समापन हो गया।