कांगू(हमीरपुर)। उपमंडल नादौन के अंतर्गत बढ़ेडा गांव में भागवत कथा के चौथे दिन शास्त्री कृष्ण शर्मा ने पांडव कथा और राजा हिरण्यकश्यप की कथा का वृत्तांत सुनाया। उन्होंने कहा कि हिरण्यकश्यप दैत्यों के राजा थे। उन्होंने ब्रह्मा जी से कठोर तपस्या करके अजेय होने का वरदान पाया था। हिरण्यकश्यप को लगता था कि वह भगवान हैं और उसने मांग की कि सभी केवल उसकी पूजा करें। हिरण्यकश्यप की पत्नी से उसे प्रह्लाद नाम का एक पुत्र पैदा हुआ। प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के अथक प्रयास किए, लेकिन कोई भी प्रयास सफल नहीं हुआ। एक दिन उन्होंने प्रह्लाद को खंभे से बांध दिया और उसे मारने लगे, तभी खंभे में से नरसिंह अवतार में प्रभु बाहर आए और उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध किया। संवाद