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Hamirpur (Himachal) News: श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सृष्टि वर्णन सुनाया

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डिडवीं टिक्कर (हमीरपुर)। ग्राम पंचायत कैहरवीं के बिरड़ी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को आचार्य चंद्रकांत ने सृष्टि वर्णन सुनाते हुए भक्तों से कहा कि सृष्टि के आदि में कुछ नहीं था। केवल अंधकार ही अंधकार, धुंध ही धुंध थी। फिर जल की उत्पत्ति हुई। जल में हलचल हुई। नारायण स्वयं प्रकट हुए, नारायण अर्थात नार जल अयन घर। जल ही जिनका घर है, वह नारायण हैं। स्वयंभू ईश्वर ने देखा कि अब मुझे सृष्टि की रचना करनी होगी। उन्होंने कहा- एको अहं बहु श्याम। मैं एक हूं और बहुत हो जाऊं। फिर ब्रह्मा जी उत्पन्न हुए। स्वयंभू ईश्वर ने उन्हें सृष्टि रचने का कार्य सौंपा। ब्रह्मा जी ने पहले चार ऋषि प्रकट किए। फिर ब्रम्हा को क्रोध आया और भृकुटि से शंकर जी उत्पन्न हुए। स्वयंभू ईश्वर ने शिव भगवान को सृष्टि रचने के लिए कहा। उन्होंने भूत, प्रेत, डाकनी, शाकनी, सांप और बिच्छू पैदा कर दिए। फिर ब्रह्म जी ने स्वयं मानवी सृष्टि की रचना की। ब्रह्मा जी ने दाएं भाग से मनु को उत्पन्न किया और बाएं भाग से शतरुपा को उत्पन्न किया। फिर ब्रह्मा जी ने उन्हें मैथुनी सृष्टि आरंभ करने की आज्ञा दी। तब से फिर मानवी सृष्टि उत्पन्न होने लगी। आचार्य ने हिरण्यकश्यप और वराह भगवान की कथा भी बड़े मार्मिक ढंग से सुनाई।
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