हमीरपुर। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के आठ एमबीबीएस प्रशिक्षु वार्षिक परीक्षा नहीं दे पाएंगे। कक्षाओं में 80 फीसदी उपस्थिति न होने के कारण अब प्रशिक्षुओं का एक साल बर्बाद हो जाएगा। नेशनल मेडिकल कमीशन (एमएमसी) की नई गाइडलाइन के मुताबिक थ्योरी कक्षाओं और प्रेक्टिकल में हाजिरी पूरा न होने पर अब सप्लीमेंटरी परीक्षा देने का विकल्प भी नहीं मिलेगा। पूर्व में हाजिरी कम होने पर वार्षिक परीक्षाओं के तीन माह बाद विद्यार्थियों को सप्लीमेंटरी परीक्षा में बैठने का मौका मिल जाता था, लेकिन अब नई गाइडलाइन में इस शर्त को बदल दिया गया है।
मेडिकल प्रशिक्षु की हाजिरी यदि पूरी नहीं होगी तो उन्हें वार्षिक परीक्षा के लिए अगले साल का इंतजार करना होगा। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में साल 2020 और 2021 के आठ प्रशिक्षुओ की कक्षाओं में उपस्थिति 80 फीसदी से कम है। नई गाइडलाइन में मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस स्टूडेंट को थ्योरी में 75 फीसदी, जबकि प्रेक्टिकल में 80 फीसदी हाजिरी अनिवार्य की गई है।
हालांकि यदि किसी विषय में कोई विद्यार्थी फेल होता है तो वह वार्षिक परीक्षा के तीन माह बाद सप्लीमेंटरी परीक्षा के पात्र होगा। गाइडलाइन में बदलाव से अब आठ विद्यार्थियों को डिग्री पूरा करने में एक साल अतिरिक्त समय लगेगा। चार साल की डिग्री अब ये विद्यार्थी पांच साल में पूरा कर पाएंगे।
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि इस विषय को मेडिकल यूनिवर्सिटी स्तर पर उठाया गया है। प्रशिक्षुओं के परिजनों ने भी इस सिलसिले में उनसे मुलाकात की है। एनएमसी की स्पष्ट गाइडलाइन है, हाजिरी पूरी न होने पर वार्षिक परीक्षा में बैठने का मौका नहीं मिलेगा। पहले सप्लीमेंटरी परीक्षाओं में ऐसे विद्यार्थियों को मौका मिल जाता था, लेकिन अब एनएमसी ने गाइडलाइन बदल दी है।