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नगर परिषद ने बैंक और शिक्षा विभाग के कर्मचारी को आवंटित किए खोखे

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हमीरपुर। नगर परिषद हमीरपुर में सरकारी बैंक में कार्यरत एक महिला कर्मचारी के पति को खोखा आवंटित करने का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत अमरोह के गांव घराल निवासी रसील सिंह पुत्र तुलसी राम ने नगर परिषद हमीरपुर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह कई सालों से नगर परिषद हमीरपुर क्षेत्र के अंतर्गत तहसील चौक के साथ दुकान करता था, जोकि पुलिस थाना से सटी हुई थी। इस दुकान का साइज 15 गुना 18 फीट था। इस दुकान से प्राप्त होने वाली आमदन से ही उसके परिवार का पालन पोषण होता था। वर्ष 2012 में नगर परिषद ने पुलिस थाना और तहसील कार्यालय के बीच से एक सड़क निकालने का प्रस्ताव पारित किया। उस दौरान नगर परिषद ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस दुकान को छोड़ दें ताकि, दुकान को गिराने के बाद यहां से सड़क निकाली जा सके। इसके बदले में नगर परिषद उसे शहर में ही अन्य जगह दुकान उपलब्ध करवाएगी। लेकिन, आज तक दुकान उपलब्ध नहीं करवाई। रसाल सिंह ने बताया कि नगर परिषद से हासिल की गई सूचना के मुताबिक परिषद ने साधन संपन्न लोगों को खोखे आवंटित किए हैं। सरकारी बैंक में कार्यरत एक महिला जिसका पति दवाई की कंपनी में कार्यरत है, उसे खोखा आवंटित किया गया। जिन्होंने इस खोखे को आगे महंगे दाम पर सबलेट किया हुआ है। एक अन्य व्यक्ति जो शिक्षा विभाग में कार्यरत है, उसे भी दुकान आवंटित की गई है। इसी तरह कुछ और दुकानों को भी महंगे दाम पर सबलेट किया गया है। दुकान गिराने के बाद जो खोखा नंबर 40 उसे अलॉट हुआ था, उसे भी किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित कर दिया गया। उन्होंने प्रशासन से इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। इसी तरह पूर्व में ढाबा संचालक ने भी इस तरह के आरोप लगाए थे। उधर, नगर परिषद हमीरपुर के कार्यकारी अधिकारी किशोरी लाल ने कहा कि अभी तक उनके पास लिखित में कोई शिकायत नहीं पहुंची है। शिकायत आने पर जांच के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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