मानसून आने तक उर्वरक का उपयोग भी करें बंद, गर्मी के मौसम में पौधों की ट्रांसप्लांटेशन भी न करें
विशेषज्ञों ने दिए फलदार बगीचों में गर्मी और सूखे के तनाव को कम करने के लिए सुझाव
संवाद न्यूज एजेंसी
रंगस (हमीरपुर)। उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के फल विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने गर्मी के मौसम में बढ़ते तापमान को ध्यान में रखते हुए फलदार बगीचों में गर्मी व सूखे के तनाव को कम करने के लिए जरूरी सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस मौसम में फलदार पौधों के इर्द-गिर्द मल्चिंग (भूसा और सूखी घास रखना) बहुत ही जरूरी है ताकि पौधों के आसपास नमी बनी रह सके। महाविद्यालय के फल विज्ञान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने कहा कि पौधे के आसपास चार से छह इंच तक ऑर्गेनिक यानी साधारण घास की मल्चिंग भी की जा सकती है। इसके अलावा पाॅली शीट के माध्यम से पौधों के आसपास मल्चिंग हो सकती है। इससे पौधों के आसपास व जड़ों में नमी रह सकती है। इसके अतिरिक्त शेड नेट का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जिससे छाया के चलते पौधों के रूट सिस्टम में नमी बनी रहे। सिंचाई के लिए ड्रिप इरीगेशन सिस्टम का उपयोग काफी लाभदायक रहता है। इससे न तो अत्यधिक सिंचाई होती है और न ही सिंचाई के लिए उपयोग होने वाला पानी बेकार जाता है। फल विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. धर्मपाल शर्मा ने कहा कि महाविद्यालय के सभी वरिष्ठ वैज्ञानिकों से चर्चा के बाद बढ़ती गर्मी में फलदार पौधों के बगीचों को कैसे सुरक्षित करें, उसके लिए कुछ जरूरी सुझाव हैं। ऐसी स्थिति में पौधों की सिंचाई सुबह-सुबह ही करनी चाहिए अन्यथा दिन में सिंचाई करने पर अत्यधिक तापमान होने की वजह से पौधे की जड़ों के आसपास पानी डालने पर मिट्टी के गर्म होने की वजह से पानी डालते ही अधिकतर सूख जाता है। पानी पौधे की जड़ों तक नहीं पहुंच पाता और जड़ों में नमी न रहने के कारण कई बार पौधे गर्मी के मौसम में सूख जाते हैं। इसलिए पौधे की सिंचाई सुबह जितनी जल्दी हो सके, फायदेमंद रहती है। साथ ही उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में उर्वरक बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं करने चाहिए। ऐसा करने से कई बार पौधों की जड़ों के आसपास की नमी भी बरकरार नहीं रह पाती। ऐसी स्थिति में उर्वरक मिट्टी में घुल नहीं पाते और नमी भी नहीं रह पाती। किसी भी उर्वरक का प्रयोग मानसून के आने के दौरान ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मौसम में पौधों की ट्रांसप्लांटेशन भी नहीं करनी चाहिए। यदि फिर भी जरूरी है तब शाम के समय में ही पौधों का ट्रांसप्लांट एक स्थान से दूसरे स्थान पर करना चाहिए। किसी भी तरह की हाइड्रो जेल यानी नमी के लिए किसी भी रासायनिक जेली का उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसी नमी थोड़ी देर के लिए ही रह पाती है और न ही पौधे की जड़ों को इससे कोई भी पोषक तत्व मिलते हैं।