हमीरपुर। जिले के किसी भी अस्पताल में एमआरआई (मैग्नेटिक रेसोनेंस एमेजिंग स्कैन) की सुविधा नहीं है। इससे जिलाभर के सैकड़ों मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में भी कई मरीज सिर में चोट या दर्द आदि के आते हैं लेकिन जब चिकित्सक यहां पर एमआईआर लिखते हैं तो मरीजों को या तो निजी लैबों या फिर सरकारी अस्पताल शिमला और टांडा की ओर रुख करना पड़ता है। इससे उन्हें आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है। जिले में छह सरकारी अस्पताल हैं लेकिन कहीं भी एमआरआई की सुविधा नहीं है।
शनिवार को डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में भी मरीजों की कतार लगी रही। ऐसे में मेडिसिन वार्ड में दाखिल एक मरीज ने नाम व फोटो न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें सिर में चोट लगी थी। ऐसे में एमआरआई करवाना था। लेकिन, अस्पताल में यह सुविधा ही नहीं है। ऐसे में बाहर ही एमआरआई करवाना पड़ा। इससे काफी खर्च हुआ। ऐसे कई मरीज हैं, जिन्हें इस समस्या का सामना करना पड़ता है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में एमआरआई का खर्च तीन से चार हजार तक होता है वहीं, निजी अस्पतालों में 10 हजार से 14 हजार तक खर्च बैठता है। कई मरीज निजी लैबों में एमआरआई करवाने में असमर्थ होते हैं। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि अस्पताल में एमआरआई नहीं होते हैं।