हमीरपुर। सर्वोच्च न्यायालय ने धोखाधड़ी के आरोप में नामजद हमीरपुर निवासी एक व्यक्ति को जमानत प्रदान की है। आरोपी के खिलाफ पुलिस थाना हमीरपुर में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 467, 468, 471 और 201 के तहत मामला दर्ज है। दरअसल हमीरपुर पुलिस ने कुछ लोगों की लिखित शिकायत पर हमीरपुर की एक निजी फाइनेंस कंपनी के निदेशक समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया था। लोगों ने आरोप लगाया था कि निजी कंपनी ने आरडी और एफडी खातों के नाम से उनसे पैसे हासिल किए, लेकिन मैच्योरिटी के बाद खाता धारकों को पैसे वापस नहीं किए।
यह भी आरोप है कि फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने कुछ खाताधारकों के दस्तावेजों पर फर्जी हस्ताक्षर करके इनका दुरुपयोग भी किया। इस पर पुलिस ने वर्ष 2021 में निजी फाइनेंस कंपनी में काम करने वाले पांच लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया। इस मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन चार आरोपियों को जिला सत्र न्यायालय हमीरपुर से जमानत मिल गई थी। जबकि फाइनेंस कंपनी का मुख्य कर्ताधर्ता को जिला न्यायालय से जमानत नहीं मिली तो उसने प्रदेश उच्च न्यायालय शिमला में अर्जी दायर कर अग्रिम जमानत हासिल कर ली।
प्रदेश उच्च न्यायालय में पुलिस ने पक्ष रखा कि धोखाधड़ी का यह मामला चार से पांच करोड़ के आसपास है। 400 से अधिक खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी होने और कंपनी का मुख्य कर्ताधर्ता की ओर से जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा है। पुलिस की इस दलील के बाद प्रदेश उच्च न्यायालय ने 5 दिसंबर 2022 में संबंधित आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द कर दी। इसके चलते आरोपी पिछले 9 महीने से जेल में था। आरोपी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहां से आरोपी को अब जमानत मिल गई है। सशर्त मिली इस जमानत में आरोपी को पुलिस की नियमित जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 10 अक्तूबर 2023 को जिला सत्र न्यायालय हमीरपुर में होगी।