हमीरपुर। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत जिला हमीरपुर के हमीरपुर पुलिस थाना में पहली एफआईआर दर्ज की गई है। भारतीय न्याय संहिता के तहत यह एफआईआर लड़ाई-झगड़ा और गाली गलौज करने को लेकर सोमवार सुबह नौ बजे पंजीकृत की गई।
भारतीय न्याय संहिता के लागू होने से पहले लड़ाई-झगड़ा और गाली गलौज करने के मामले में आईपीसी की 323, 504, 506, 34 लगाई जाती थी। मगर नए आपराधिक कानूनों के तहत 323 की जगह 115, 504 की जगह 352, 506 की जगह 351 (2) और आईपीसी की धारा 34 की जगह 3 (5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है।
मामले में रमेश कुमार पुत्र रामचरण निवासी बोहणी ने शिकायत दर्ज करवाई है कि वह अपने घर के आंगन में खड़ा था। इस दौरान उनके साथ देवी दास, प्रकाश चंद, निर्मला देवी ने गाली गलौज और लड़ाई-झगड़ा किया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हमीरपुर में प्रशिक्षित किए पुलिस कर्मचारी
तीन नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद हमीरपुर जिला हमीरपुर सतर्क हो गई है। कानूनों को लागू करने के लिए पहले ही पुलिस अधिकारियों को इस संबंध में कार्यशालाएं लगाकर प्रशिक्षित किया जा चुका है। वहीं अब भी कार्यशालाएं लगाई जा रही हैं। पुलिस थानों में अब दंड की बजाय न्याय पर अधिक कार्य किया होगा। पुलिस के लिए भी मामलों में कार्रवाई करने और कोर्ट में भी मामलों के निपटान के लिए समय निर्धारित किया गया है। सभी कार्य आधुनिक व तकनीक के माध्यम से किए जाएंगे।
जिला हमीरपुर में पांच पुलिस थाने हैं। पुलिस थाना हमीरपुर, सुजानपुर, नादौन, भोरंज और बड़सर में कंप्यूटर के साथ ही इंटरनेट की भी सुविधा उपलब्ध है। पुलिस थाना में तैनात कर्मचारियों को नए आपराधिक कानूनों के तहत आने वाली धाराओं को लेकर एनसीआरबी संकलन ऑफ न्यू क्रीमिनल लॉ एप को इंस्टॉल करवाया गया है, ताकि किसी भी कर्मचारी को धाराओं को समझने में परेशानी न हो। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हमीरपुर राजेश कुमार ने कहा कि थानों में सुविधाएं उपलब्ध है। कर्मचारियों को कार्यशालाओं के माध्यम से बीएनएस से अवगत करवाया जा रहा है।
अब 420 की जगह लगेगी बीएनएस धारा की 318
पुलिस थाना हमीरपुर में सोमवार को नए आपराधिक कानूनों को लेकर कार्यशाला हुई। कार्यशाला की अध्यक्षा एएसपी राजेश कुमार ने की। पुलिस थाना प्रभारी हरीश गुलेरिया ने पुलिस कर्मचारियों, सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारियों को भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जानकारी दी। साथ ही धाराओं में हुए परिवर्तन के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पुरानी आईपीसी में 511 धाराएं थी, जबकि भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत 107 प्रावधानों में बदलाव के साथ नौ नए प्रावधान किए गए हैं। अपराधी की दो से अधिक पेशियां नहीं होंगी। कोर्ट में भी 45 दिन के भीतर निर्णय आएगा। हत्या पर पहले आईपीसी 302 लगती थी, अब 103 बीएनएस लगेगी। हत्या का प्रयास करने पर पहले 307 आईपीसी लगती थी अब 109 बीएनएस लगेगी। ठगी पर पहले 420 आईपीसी लगती थी, लेकिन अब 318 बीएनएस लगाई जाएगी। चोरी पर पहले 379 की जगह अब 303 बीएनएस लगेगी। दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म में पर पहले आईपीसी की 375 और 376 धाराएं लगती थीं लेकिन अब बीएनएस की धारा 63, 64, और 70 लगेंगी।