हमीरपुर। उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी हमीरपुर की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दीपा शर्मा ने कहा कि किसानों को वैज्ञानिक तरीके से बागवानी करनी चाहिए। इससे उनकी आय बढ़ेगी और बागवानी के बेहतर परिणाम मिलेंगे। उन्होंने किसानों को बरसाती प्याज की पनीरी तैयार करने की भी सलाह दी। डॉ. दीपा शर्मा ने शुक्रवार को ग्राम पंचायत बारीं के तहत पंचायत समिति सभागार टौणी देवी में किसानों को एक दिवसीय विशेष जागरूकता शिविर में ऊंचे क्षेत्रों में बागवानी की जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि नेरी महाविद्यालय की ओर से किसानों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर शिविरों आयोजित किए जाते हैं, जिसमें नवीन जानकारियां उन्हें प्रदान की जाती हैं।
किसान खरीफ प्याज उत्पादन की ओर भी अधिक ध्यान दें। इसकी नई बरसाती प्याज की किस्म तैयार की गई है। प्याज भारत की प्रमुख नगदी फसल है, यह हर दिन घर में प्रयोग होता है। इसके लिए लोगों को विशेष प्रयास करना चाहिए। खरीफ प्याज उत्पादन वर्ष भर प्याज की उपलब्धता एवं किसान की आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण विकल्प है। खरीफ प्याज की फसल अक्तूूबर और नवंबर में तैयार हो जाती है, जो अक्तूबर में प्याज की आसमान छूती कीमतों को सामान्य बनाए रखने में सहायक होती है। उन्होंने बताया कि प्याज की पौध तैयार करने के लिए 3 मीटर लंबी, 1 मीटर चौड़ी तथा 15 से 20 सेंटीमीटर ऊंची क्यारियां बनाएं। दो क्यारियों में 30 से 40 सेंटीमीटर का अंतर रखें। क्यारी की सतह समतल व कंकड़ रहित होनी चाहिए। बीज बोने से पहले इसे थीरम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। बीज को 5 से 7 सेंटीमीटर की दूरी पर एक कतार में मई-जून में बोएं तथा इन्हें छनी हुई गोबर की खाद से ढक दें और हल्की सिंचाई करें ताकि मिट्टी में उपयुक्त नमी व तापमान बना रहे। बीज अंकुरण के बाद घास को तुरंत हटा दें। लगभग 6 से 7 सप्ताह में पौध प्रतिरोपण के लिए तैयार हो जाती है। इस तरह तैयार पौध की जुलाई में 15 बाई 10 सेंटीमीटर अंतर से रोपाई करनी चाहिए। पौधारोपण के बाद अन्य समस्त क्रियाएं जैसे सही खाद एवं उर्वरक, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण व संरक्षण इत्यादि अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। महाविद्यालय के डॉ. अजय बनयाल ने आम, नींबूू, संतरा व अन्य फलदार पौधों के बारे में किसानों को जानकारी दी कि किस तरह से बागवानी को बढ़ावा जा सकता है। इसके लिए वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने किसानों को दवाइयां का छिड़काव सही मात्रा में करने का सुझाव दिया, जिससे फसल को इसका नुकसान न हो। इससे पूर्व बागवानी विकास अधिकारी टौणीदेवी डाॅ. जीना बन्याल ने विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।