रंगस (हमीरपुर)। उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी में फ्लोरीकल्चर विभाग की ओर से मौसमी फूलों की नर्सरी तैयार की गई है। इन फूलों के माध्यम से फ्लोरीकल्चर विषय में यूजी और पीजी करने वाले विद्यार्थी एवं किसान फूलों की खेती करने की तकनीकों के बारे में जानकारियां हासिल कर रहे हैं।
फ्लोरीकल्चर विभाग की वैज्ञानिक डॉ. जागृति गुप्ता ने कहा कि परंपरागत खेती करने के बजाय फूलों की खेती करने पर क्षेत्र के किसान अच्छी खासी आर्थिक आय अर्जित कर सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए इच्छुक किसान किसी भी कार्य दिवस के मौके पर उनसे या तो फोन पर या फिर महाविद्यालय में आकर तकनीक की जानकारी हासिल कर सकते हैं। यही नहीं जरूरत पड़ने पर उन्हें मौसमी फूलों की पनीरी भी उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा। इससे पहले भी अनेक किसान महाविद्यालय में पहुंचकर फूलों की पनीरी लेने का लाभ उठा चुके हैं। महाविद्यालय के डीन डॉ. कमल शर्मा ने कहा कि महाविद्यालय में फ्लोरीकल्चर विभाग ने फूलों की नई नई किस्में विकसित की हैं। उनका निश्चित तौर पर क्षेत्रवासियों को लाभ मिल रहा है। इसके साथ-साथ महाविद्यालय के फ्लोरीकल्चर विषय के छात्रों को भी नए परीक्षण करने के लिए नया फील्ड मिला है। विभाग ने सर्दियों के सीजन में फूलों की पनीरी बेचकर 60 हजार रुपये का आर्थिक लाभ भी प्राप्त किया है। इनमें आइस प्लांट, लुपिन, रेड पॉपी, येलो पॉपी फूल की पनीरी तैयार की गई था। सर्दियों का सीजन खत्म होने वाला है। अब गर्मी के मौसम में लगने वाले फूलों की पनीरी मार्च के अंत तक मिल सकती है। इनमें मेरी गोल्ड, जीनिया, गोमफरोना रोज और पॉट प्लांट फूलों की पनीरी शामिल है।
नीदरलैंड को ही विश्व की 50 फीसदी फूलों की खेती करने का गौरव
विश्वभर में अकेले छोटे से देश नीदरलैंड को ही विश्व की 50 फीसदी फूलों की खेती करने का गौरव हासिल है। इसलिए नीदरलैंड को फूलों का देश भी कहा जाता है। लेकिन, भारतवर्ष में फूलों की खेती करने की स्थिति के बारे में यदि कहा जाए तो विश्व का मात्र एक फीसदी फूल उत्पादन ही देश में किया जाता है। इसलिए वर्तमान समय की मांग है कि परंपरागत खेती के साथ हमारे देश के किसान फूलों की खेती करने पर भी ध्यान दें तो अच्छी आर्थिक आय अर्जित कर सकते हैं। कई किसानों ने परंपरागत खेती को छोड़कर अब फूलों की खेती करने पर ध्यान केंद्रित किया है ताकि ठीक से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करके आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बना जा सके।