सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे पंकज की दिल दहला देने वाली मौत की खबर सुन जौह गांव चीख पुकार से गूंज उठा। पंकज की मौत की खबर सबको गहरा आघात दे गई। गांव में मातम पसरा है। पंकज की मां अनु, दादा-दादी और बूढ़ी नानी का रो-रो कर बुरा हाल है।
पंकज की मौत से परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। पंकज के सहपाठी और स्कूल स्टाफ सदस्य भी ऐसे गमगीन माहौल में अपने आंसु नहीं रोक पाए। पंकज के परिजन रोते हुए एक ही बात कह रहे थे कि पंकज पर घर और स्कूल से कोई दबाव नहीं था तो उसने ऐसा कदम क्यों उठाया।
वीरवार सुबह स्कूल जाते समय भी उसके चेहरे पर ऐसी कोई शिकन नहीं थी जिससे इस वारदात का आभास होता। उन्होंने कहा कि अगर स्कूल जाने से पहले उसका स्कूल बैग उन्होंने चेक किया होता तो शायद यह घटना नहीं होती।
पंकज के सहपाठियों में मनीषा, प्रीति, कविता, सारिका और रजनी का कहना है कि पंकज पांच छात्राओं में अकेला लड़का सहपाठी था। इसी साल उसने मिडल स्कूल जौह में दाखिला लिया था। हालांकि पढ़ाई में भी पंकज सामान्य था। पंकज ऐसा कदम उठा लेगा, किसी ने नहीं सोचा था।
अध्यापकों की मानें तो स्कूल में रिवीजन चल रहा था। होमवर्क नहीं करने का कोई सवाल नहीं उठता। पंकज की मौत पर स्कूल मुख्याध्यापक अशोक कुमार, ग्राम पंचायत प्रधान गुरबख्श सिंह, जिला परिषद सदस्य संगीता शर्मा, उपप्रधान अमृत लाल और वार्ड सदस्य सरिता देवी, माया देवी और मीना देवी ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।