जिले के मुख्य शहर, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे शिक्षण संस्थानों की वैधता की जांच पुलिस करेगी। प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला पुलिस हरकत में आ गई है। एडिशनल एसपी हमीरपुर ने जिले के पांचों थाना प्रभारियों को उनके क्षेत्रों में चल रहे निजी शिक्षण संस्थानों का निरीक्षण करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
अब थाना प्रभारी प्राइवेट शिक्षण संस्थानों की विवि और बोर्ड से मान्यता और टीचिंग स्टाफ की शैक्षणिक एवं व्यवसायिक योग्यता की जांच कर जिला पुलिस मुखी को जांच रिपोर्ट सौंपेंगे। प्रदेश हाईकोर्ट ने धर्मशाला के एक निजी प्रशिक्षण संस्थान के मैनेजर की याचिका को खारिज कर जांच के आदेश जारी किए हैं।
सूबे में शिमला और सोलन के बाद सबसे अधिक निजी शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान हमीरपुर में चल रहे हैं। अब तक सभी शिक्षण संस्थान खुद को किसी न किसी विश्वविद्यालय और बोर्ड से संबद्ध होने का दावा करते रहे हैं।
हालांकि, पुलिस जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगा कि पैसों की आड़ में कितने फर्जी शिक्षण संस्थान जिले में चल रहे हैं। हमीरपुर में कंप्यूटर ट्रेनिंग, फैशन डिजाइनिंग, सिलाई-कढ़ाई, टेली कंप्यूटिंग, अकाउंटिंग, बीएड, जेबीटी, दूरस्थ शिक्षण संस्थान से एमबीए, एमसीए, होटल मैनेजमेंट और नर्सिंग जैसे कोर्स करवाए जा रहे हैं।
कोचिंग के लिए स्कूलों में डम्मी एडमिशन का धंधा
हमीरपुर जिले में प्रदेश के सबसे अधिक प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कई नामी स्कूलों में विद्यार्थियों की डम्मी एडमिशन की गई हैं। इन स्कूलों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी चंडीगढ़, दिल्ली, कुरुक्षेत्र और पुणे जैसे शहरों के कोचिंग सेंटरों में पढ़ रहे हैं। लेकिन अभिभावक हमीरपुर के स्कूलों में अपनी बच्चों की फीसें भरकर दाखिले के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं।
जिला के सभी थाना प्रभारियों को उनके क्षेत्र के अधीन चल रहे प्राइवेट शिक्षण संस्थानों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन होगा। अगर किसी शिक्षण संस्थान में गड़बड़ी पाई गई तो क्रिमनल केस दर्ज होंगे।
- डॉ. शिव कुमार, एडिशनल एसपी हमीरपुर