बेटे की बेरोजगारी ने एक मां की जान ले ली। लेकिन इस कलीयुगी बेटे ने मां की ममता का ख्याल भी नहीं रखा। वहीं मां जिसने नौ महीने तक उसे अपनी कोख में रखा और उसके बाद परिवार में गरीबी की परवाह न करते हुए उसे पढ़ाया-लिखाया। बेटे के सारे खर्चे पूरे किए।
मनोज कुमार ने स्नातक तक शिक्षा पूरी करनेे के बाद बैंकिंग का कोई कोर्स भी कर रखा था। पढ़ा-लिखा होने के बावजूद मनोज कुमार की उम्र 30 वर्ष को पार कर चुकी थी। शिक्षित होने के बावजूद उसके पास कोई काम धंधा नहीं था। रोज-रोज के बेरोजगारी के तानें सुनकर मनोज तंग आ चुका था। वीरवार को जब उसकी मां के मुंह से रोजी रोटी कमाने के लिए शब्द निकले तो गुस्साए युवक ने मां का कत्ल कर दिया।
मनोज के पिता मिस्त्री का काम किया करते हैं। मनोज ने घर पर रखे अपने पिता के औजार में से धज्जी निकाली और अपनी मां के सिर पर दे मारी। मनोज कुमार ने धज्जी से पीट-पीटकर अपनी मां को बुरी तरह से जख्मी कर दिया। इसके बाद बीच-बचाव करने उतरे अपने पिता को भी नहीं बख्शा।
हालांकि पिता अपने दोपहिया वाहन पर सवार होकर बाहर से सीधे घर ही पहुंचे थे। पिता श्रवण कुमार ने अपने सिर से हेल्मेट भी नहीं उतारा था कि बेटे ने उनपर भी हमला कर दिया। हेल्मेट होने के कारण श्रवण बाल-बाल बच गए। मनोज कुमार का एक बड़ा भाई है, जो प्राइवेट नौकरी करता है। जबकि दो बहनों की शादी हो चुकी है। घर पर मनोज के अलावा माता और पिता समेत तीन ही सदस्य रहते थे।