जिला हमीरपुर में नई बंदूक या रिवॉल्वर रखना अब आसान नहीं होगा। जिला प्रशासन इसके लिए गृह विभाग के निर्देशों को बारीकी से जांचेगा। सिर्फ आतंकवादी धमकी मिलने पर ही जिला प्रशासन बंदूक के लाइसेंस पर विचार करेगा।
हाल ही में हमीरपुर के कसीरी जंगल में शिकार खेलते हुए युवक की मौत के बाद बंदूक लाइसेंस को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। साथ ही हथियारों की तरफ बढ़ती प्रवृत्ति और वन्य प्राणी सुरक्षा अधिनियम के तहत वन्य प्राणियों की सुरक्षा के लिए भी बंदूक का लाइसेंस देने में सख्ती करने की मूड में है।
लोगों की बंदूकें जंगली जानवरों पर कहर बरपा रही हैं। जिले में हर एक हजार व्यक्ति के पीछे एक बंदूकधारी खड़ा है। हमीरपुर की कुल आबादी करीब साढ़े चार लाख है। जिला प्रशासन के रिकॉर्ड के मुताबिक हमीरपुर में चार हजार लोगों के पास अपनी रिवाल्वर या राइफल है। आर्म्स लाइसेंस के तहज दर्ज यह आंकड़ा इन हथियारों के उपयोग पर सवाल उठा रहे हैं।
वन जीव संरक्षण अधिनियम के तहत जंगली जानवरों का शिकार गैर कानूनी है। इन बंदूकों का प्रयोग शिकार के लिए नहीं हो सकता है तो जिले की सीमा किसी पड़ोसी देश के साथ भी नहीं लगती। यहां किसी आतंकवादी के घुसने की संभावना नहीं है और न ही किसी को आतंकवादी से कोई धमकी मिली है। साथ ही हमीरपुर एक शांतिपूर्ण जिला है जहां पर अन्य राज्यों की तरह कोई बड़े कारोबारी भी नहीं हैं जिन्हें अपनी सुरक्षा के लिए हथियार रखने की जरूरत हो।
इस सबके बावजूद जिले में इतनी बड़ी संख्या में आर्म्स लाइसेंस का पंजीकरण कई सवाल उठा रहा है। गृह मंत्रालय ने भी नए हथियार के पंजीकरण पर कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं। नए लाइसेंस के लिए कई औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सशर्त आर्म्स लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं।
एक फरवरी को भोटा के समीपवर्ती कसीरी गांव के जंगल में हुए गोलीकांड में एक मेकैनिक की मौत ने भी इन लाइसेंसों पर सवाल उठाए हैं। इससे साबित होता है कि जिले में अधिकतर आर्म्स लाइसेंस का प्रयोग जंगली जानवरों के शिकार के लिए हो रहा है।
अतिरिक्त उपायुक्त हमीरपुर रूपाली ठाकुर ने कहा कि नई लाइसेंस पर गृह विभाग ने कई तरह की शर्तें लागू की हैं। पहले की तर्ज पर आर्म्स लाइसेंस हासिल करना आसान नहीं है। उन्होंने माना कि जिले में चार हजार से अधिक आर्म्स लाइसेंस पंजीकृत हैं।