हमीरपुर। दो साल के बच्चे की किडनैपिंग में पुलिस, सीआईडी और जांच एजेंसियां तीन साल के बाद भी किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाई हैं। किडनैपिंग का मामला दर्ज कर करीब तीन साल पहले हमीरपुर पुलिस ने मामले की जांच की, लेकिन मासूम का कोई सुराग नहीं लगा। बाद में मामला सीआईडी को सौंपा गया, लेकिन दो साल तक सीआईडी भी मामले को नहीं सुलझा पाई। इसके बाद मामले को एसआईटी को सौंप दिया गया। आरोपी अभी तक कानून की पकड़ से दूर हैं। आदित्य के माता-पिता अभी भी मासूम के घर लौटने के इंतजार में हैं।
15 फरवरी, 2015 को सलासी स्थित अपने घर के आंगन में दो साल का आदित्य खेल रहा था। खेलते समय अचानक आदित्य गायब हो गया। आदित्य के गायब होने के कुछ देर बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग पाया। परिजनों ने पुलिस थाना में आदित्य की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने आदित्य की तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। इसके चलते मामला सीआईडी को सौंपा गया। आदित्य की मां का आरोप था कि उसने आखिरी बार बेटे को उन्हीं के घर में किराये के कमरे में रहने वाले एक लड़के के साथ देखा था, जो होटल मैनेजमेंट संस्थान सलासी का छात्र था।
4 अप्रैल 2015 को देर रात फिरौती मांगने के आरोप में मध्यप्रदेश के इस युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया, लेकिन बाद में युवक मुकर गया और सारी कहानी ही पलट गई। सीआईडी आरोपी युवक का नार्को टेस्ट करवाना चाहती थी, लेकिन युवक के माता-पिता ने इसकी इजाजत नहीं दी। इसके बाद पुलिस ने शक के आधार पर बच्चे के ताया और ताई का नार्को टेस्ट भी करवाया, लेकिन इससे भी कुछ हाथ नहीं लगा। एसआईटी की जांच भी महज पूछताछ तक सीमित रह गई है।
उधर, एसआईटी के प्रभारी इंस्पेक्टर राज कुमार का कहना है कि आदित्य मामले की जांच में उनकी टीम जुटी हुई है, लेकिन अभी तक कामयाबी हाथ नहीं लगी है।