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पुरानी पेंशन को लागू करे सरकार : मंच

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हमीरपुर। हिमाचल शिक्षक मंच ने प्रदेश में नई पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन लागू करने की मांग की है। मंच के प्रदेश संयोजक अश्वनी भट्ट, तपिश थापा, संजय मोगू, संजीव राणा, विजय शमशेर भंडारी और सुनील राजपूत ने कहा कि प्रदेश में 15 मई 2003 के बाद से प्रदेश में पुरानी पेंशन के स्थान पर लागू की गई नई पेंशन योजना में खामियों की भरमार है। इस योजना के तहत प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के भविष्य पर खतरा पैदा हो गया है। इस योजना के तहत कर्मचारी के सेवाकाल के समय में कर्मचारी अपने मूल वेतन का दस फीसदी जमा करवाता है। जबकि, दस प्रतिशत राशि ही सरकार डालती है। इस प्रकार कुल जमा राशि का सेवानिवृत्ति के समय में अधिकतम साठ फीसदी ही कर्मचारी को मिल सकता है। जबकि, बाकी के 40 फीसदी को अनिवार्य रूप से कंपनियों के माध्यम से शेयर बाजार में निवेश किया जाता है। इस पर प्राप्त ब्याज को ही कर्मचारी को पेंशन के रूप में दिया जाता है। देखने में यह आ रहा है कि 70,000 रुपये प्राप्त करने वाले कर्मचारी को केवल 700 रुपये की नाममात्र की पेंशन ही मिल पा रही है। इतनी कम आय से कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद का समय गुजारना असंभव है। एक कल्याणकारी राज्य में अपने कर्मचारियों के भविष्य का ख्याल रखना सभी लोकतांत्रित सरकारों की जिम्मेदारी है। जिससे सरकारें बच नहीं सकतीं। कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। वर्तमान व्यवस्था में सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी प्रकार की निश्चित आय की कोई गारंटी नई पेंशन योजना में नहीं है। अत: मंच यह मांग करता है प्रदेश की सरकार पहल करते हुए नई पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना को लागू करे। पूरे देश व प्रदेश के लाखों कर्मचारी इस एकमात्र मांग को लेकर लामबंद हो रहे हैं। इसी मांग की तहत केंद्र और प्रदेश सरकार ने भी प्रस्तावित बजट में सरकार के अंशदान को दस की बजाय 14 फीसदी कर दिया है लेकिन इसका लाभ कर्मचारियों की न होकर कंपनियों को ही जाएगा। कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ा मुद्दा है जिसका एकमात्र हल पुरानी पेंशन योजना की बहाली ही है। प्रदेश में 15 फरवरी को प्रस्तावित नई पेंशन योजना के विरोध में जो रैली की जा रही है, मंच ने भी इसे अपना समर्थन देने की घोषणा की है। मंच का प्रतिनिधिमंडल मंच के प्रदेश संयोजक अश्वनी भट्ट के नेतृत्व में शिमला में इसके समर्थन में शामिल होगा।
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