हमीरपुर। जेबीटी और डीएलएड उत्तीर्ण प्रशिक्षुओं ने बीएड को जेबीटी के समकक्ष मान्यता प्रदान करने पर रोष प्रकट किया है। जेबीटी/डीएलएड प्रशिक्षित बेराजगार संघ ने एक अहम मीटिंग का आयोजन कर सरकार से इस निर्णय को बदलने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक ठाकुर, उपाध्यक्ष बोधराज, कोषाध्यक्ष नवीन शर्मा संयोजक इंद्रजीत, बंटी, संजना धीमान समेत अन्य डीएलएड प्रशिक्षुओं का कहना है कि जब प्रदेश सरकार ने अलग-अलग डाइट और प्राइवेट संस्थान खोल रखे हैं और अलग से उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ऐसे में बीएड डिग्री धारकों को जेबीटी/डीएलएड के सामान कैसे आंका जा सकता है। एनसीटीई के रूल ऐसे राज्यों के लिए बने हैं, जहां पर जेबीटी/डीएलएड प्रशिक्षु कम हैं। लेकिन, हिमाचल की बात की जाए तो प्रदेश में 18000 से 20000 लोग जेबीटी का प्रशिक्षण लेकर बेरोजगार नौकरी की आस लगाए बैठे हैं और साथ ही वर्तमान 6000 डीएलएड प्रशिक्षु एक साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं तो ऐसे में सरकार को यह सोचना चाहिए कि प्रदेश में जेबीटी की जगह बीएड को मान्य करना उचित है या नहीं। जेबीटी/डीएलएड प्रशिक्षुओं ने मांग की है कि 12 मार्च को ट्रिब्यूनल की ओर से हिमाचल सरकार से जो पक्ष मांगा गया है उसमें सरकार मजबूती से जेबीटी डिप्लोमा धारकों का पक्ष रखें ताकि, जेबीटी/डीएलएड प्रशिक्षुओं का भविष्य उज्जवल रहे।