नादौन(हमीरपुर)। नेशनल डेवेलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ओपी शर्मा ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी बोली व उपबोलियां विकसित नहीं हो रही हैं, इनकी उपेक्षा हो रही है। जिसे लेकर साहित्यकारों में रोष है। साहित्य अकादमी भी मान्यता प्राप्त भाषा है और विकास हो रहा है। देश के कई प्रांतों की सरकारें अनुदान देती हैं। देश के कई प्रांतों की बोलियां मान्यप्राप्त भाषा हैं और विकास हो रहा है। पंजाब की पंजाबी, जम्मू की डोगरी तथा अन्य प्रदेशों की बोलियां निरंतर प्रगति कर रही हैं लेकिन पहाड़ी बोली की अपेक्षा ही हो रही है। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों ने पहाड़ी बोली में साहित्य लिखकर सराहनीय कार्य किया है। साहित्कार विनोद मैहरा, केहर सिंह मित्र ने भी पहाड़ी भाषा को आठवीं सूची में शामिल किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी बोली को संविधान की 8वीं सूची में दर्ज किया जाए ताकि पहाड़ी भाषा देश प्रदेश में लोकप्रिय हो।