हमीरपुर। नगर परिषद हमीरपुर के वार्ड नंबर छह में सरकारी दुकान का अवैध सौदा रद्द हो गया है। दुकानदार को वापस दुकान मिल गई है। जिससे उसने राहत की सांस ली है। 15 सितंबर को ‘अमर उजाला’ में खबर छपने के बाद खरीदार और विक्रेता दोनों में हड़कंप मच गया था। वहीं नगर परिषद ने भी दोनों दुकानदारों का एग्रीमेंट रद्द कर किसी तीसरे पात्र व्यक्ति को दुकान आवंटित करने की बात की। करीब सवा दो लाख रुपये डूबते देख खरीदार ने अपने पैसे वापस ले लिए और दुकान की चाबी असली मालिक को सौंप दी। दुकानदार चंदन ने पूर्व की भांति अपना कारोबार दुकान पर शुरू कर दिया है। कुछ वर्ष पूर्व नगर परिषद हमीरपुर ने शहर में रेहड़ी फड़ी लगाने वालों के लिए बस स्टैंड के समीप अस्थायी दुकानें बनाई थीं। करीब 60 से अधिक इन दुकानों में से एक दुकान सोहन लाल को आवंटित हुई थी। लेकिन, बीमार रहने के चलते सोहन लाल का बेटा चंदन कुमार ही दुकान को संभालता था। गत दिवस वह मणिमहेश यात्रा के लिए जिला चंबा गया हुआ था। इस दौरान पीछे से एक व्यक्ति ने उसके पिता से मिलकर करीब 2.10 लाख रुपये में दुकान का सौदा कर लिया। 1.60 लाख रुपये बैंक खाते में, जबकि 50 हजार रुपये नकद देकर एक शपथ पत्र पर पिता से हस्ताक्षर करवाकर दुकान पर कब्जा कर लिया। जब वह वापस हमीरपुर पहुंचा तो देखा कि दुकान पर ताला लगा हुआ था। चंदन ने इस मामले की शिकायत नगर परिषद हमीरपुर, पुलिस और उपायुक्त हमीरपुर से की थी। नियमों के अनुसार नगर परिषद की दुकान को कोई भी दुकानदार बेच नहीं सकता। मालिकाना हक नगर परिषद का होने के चलते इस दुकान का अवैध सौदा किया गया, जिसे नप ने रद्द करने की चेतावनी दी लेकिन, इससे पहले ही दोनों पक्षों ने आपस में मामला निपटा लिया। उधर, नप के ईओ विनोद कुमार शर्मा का कहना है कि दुकानदार उनके पास शिकायत लेकर आया था। लेकिन, दोनों पक्षों ने कार्रवाई से पूर्व ही आपस में मामला सुलझा लिया।