ताल (हमीरपुर)। नींद से उठ जाओ अंशिका दीदी, कमरे में आग लग गई है.... 9 साल का छोटा भाई बहन को नींद से जगाता रहा लेकिन, मौत बनकर आई नींद ने बहन को एक भाई से हमेशा के लिए अलग कर दिया। वीरवार रात साढ़े नौ बजे जब अमनेड़ गांव के एक घर में अचानक आग लग गई तो तीसरी कक्षा में पढ़ने वाला छोटा भाई सूर्यांश बार-बार बहन को जगाने का प्रयास करता रहा। बहन को जगाने के प्रयास में खुद भी 40 फीसदी जल गया। टांडा मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के बिस्तर पर पड़ा सूर्यांश अब खुद जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। इस अग्निकांड ने सबको झकझोर दिया है। वहीं, बुरी तरह से झुलसा पिता भी अस्पताल में उपचाराधीन है। पिता संजय कुमार उनकी धर्मपत्नी हादसे के समय गोशाला में बीमार चल रही भैंस को देखने गए हुए थे। उन्हें क्या पता था कि जैसे ही वह कमरे से बाहर आएंगे तो पीछे आग लग जाएगी। संजय कुमार का कहना है कि अगर जरा भी आग का एहसास होता तो वह गोशाला में कभी न जाते। हादसे के वक्त पास में ही दूसरे कमरे में बच्चों की बुजुर्ग दादी 70 वर्षीय कलां देवी सोयी हुई थीं। जिस मकान में आग लगी वह एक ही कमरा था। साथ से सटा कोई कमरा न होने के चलते किसी को आग का पता नहीं चल पाया। आग की लपटें जब आसमान को छू रहीं थीं तो गोशाला गए माता-पिता को आग का पता चला। लेकिन, तब तक काफी देर हो चुकी थी। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है।