नादौन(हमीरपुर)। उत्तरी भारत की सीमाओं को सुरक्षित बनाने में ऐतिहासिक योगदान देने वाले जनरल जोरावर सिह की जयंती 13 अप्रैल को धूमधाम से मनाई जाएगी। जोरावर सिंह का जन्म 13 अप्रैल 1786 को चंद्रवंशी राजपूत हरजे सिंह ठाकुर के घर गांव अंसरा मौजा हथोल तहसील नादौन जिला हमीरपुर में हुआ। उनके पिता कहलूर (बिलासपुर) रियासत के दरबारी थे। गांव में भूमि विवाद को लेकर झगड़े के कारण वे घर छोड़ कर हरिद्वार चले गए। इसके बाद उनकी मुलाकात राजा गुलाब सिंह से हुई। इसके बीच उन्होंने अनेक युद्ध लड़े और अपनी वीरता का परिचय दिया। उत्तरी भारत की सीमाओं को सुरक्षित बनाने में ऐतिहासिक योगदान के लिए जनरल जोरावर सिंह को हमेशा याद रखा जाएगा। जोरावर सिंह एक महान योद्धा, कुशल प्रशासक, वीर और साहसी ही नहीं बल्कि धर्म परायण व स्वामी भक्त भी थे। उनकी दूरदृष्टि का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने वर्तमान से लगभग 200 वर्ष पूर्व उत्तरी सीमा से भारत को होने वाले खतरे का आभास हो गया था। उन्होंने सीमा विस्तार मैदानी क्षेत्रों की तरफ करने के बजाय दुर्गम भू-भाग की ओर अपना अभियान शुरू किया। इस महान योद्धा की वीरता के परिणाम स्वरूप लद्दाख महाराजा गुलाब सिंह राज्य का हिस्सा बना और आज भारत का भू-भाग है। 12 दिसंबर 1841 को जोरावर सिंह को गोली लग गई और उन्हें शहादत प्राप्त हुई।