रंगस(हमीरपुर)। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज जोलसप्पड़ में निर्माणाधीन अस्पताल के ऊपर से गुजरने वाली 132 केवी की बिजली टावर लाइन को शीघ्र ही भूमिगत किया जाएगा। निर्माणाधीन अस्पताल और दूसरे चरण के निर्माण के लिए जंदली गुजरां में ली गई भूमि के बीच में, अणु से चौहाल होशियारपुर पंजाब के लिए जाने वाली बिजली आपूर्ति के लिए स्थापित टावरों पर लगी तारों को पंजाब बिजली बोर्ड शीघ्र ही या तो भूमिगत या फिर दूसरी जगह के लिए टावरों को शिफ्ट कर सकता है। इसके लिए बकायदा पंजाब बिजली बोर्ड और हिमाचल बिजली बोर्ड की टीमों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन की मौजूदगी में संयुक्त निरीक्षण भी किया है। निरीक्षण के दौरान राजस्व रिकॉर्ड की भी जांच मौके पर की गई और समस्या का समाधान निकालने के लिए योजना के प्रारूप को लेकर चर्चा भी गई है। नायब तहसीलदार कांगू बलवंत सिंह ने कहा कि एसडीएम नादौन के आदेशानुसार मौके का निरीक्षण किया गया। मेडिकल कॉलेज के लिए बनने वाले अस्पताल के ऊपर से पंजाब बिजली बोर्ड की एक बड़ी टावर लाइन जाती है। इसको अस्पताल के ऊपर से शिफ्ट करने के लिए पंजाब बिजली बोर्ड के अधिकारी और प्रदेश बिजली बोर्ड के सहयोग से संयुक्त टीम के रूप में और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर आए। उन्होंने संयुक्त निरीक्षण के दौरान जंदली गुजरां और टीका थाईं में वर्षों पुराने स्थापित टावरों के बीच में आने वाली जगह का निरीक्षण किया और मौके पर ही राजस्व रिकॉर्ड को भी जांचा गया। उन्होंने कहा कि दो टावरों के बीच में राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार आने वाली अधिकतर जमीन वैसे तो सरकारी ही है, लेकिन चार के करीब निजी भूमि मालिकों की भूमि भी इसके तहत आ सकती है। इसलिए लाइन शिफ्ट करने की योजना के तहत आने वाले भूमि मालिकों से शीघ्र ही सहमति लेने के लिए अधिकारियों के माध्यम से बात की जाएगी। इसके लिए एसडीएम नादौन को भी सूचित कर दिया जाएगा। ताकि आदेश मिलते ही इनसे बात की जा सके।
प्रदेश बिजली बोर्ड के तहत ट्रांसमिशन विंग हमीरपुर के अधिशासी अभियंता अमित कुमार ने कहा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से पंजाब बिजली बोर्ड को अपनी टावर लाइन शिफ्ट करने का आग्रह किया गया था। ताकि अस्पताल के निर्माण कार्य में या भविष्य में भी कोई भी बाधा न आए उसी के तहत पंजाब बिजली बोर्ड और प्रदेश बिजली बोर्ड के अधिकारियों ने कॉलेज प्रशासन की मौजूदगी में साइट का संयुक्त निरीक्षण किया है। ताकि टावरों के ऊपर लगी बिजली के तारों को शिफ्ट करने की योजना पर काम किया जाए और अतिशीघ्र शिफ्टिंग के लिए होने वाले खर्च का एस्टीमेट बनकर तैयार हो सके और शीघ्र ही योजना को अंतिम रूप दिया जा सके। निरीक्षण के दौरान पंजाब और हिमाचल बिजली बोर्ड के अधिकारियों ने फिलहाल मेडिकल कॉलेज के बीच में आने वाली लाइन को भूमिगत करने के बारे में चर्चा की है।
यदि लाइन को भूमिगत किया जाता है तब महज दो मीटर चौड़ी जगह ही एक्वायर्ड करनी पड़ेगी अन्यथा टावर शिफ्ट करने के लिए अधिक जगह की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन अभी तक फिलहाल योजना को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। लेकिन विषय को लेकर एक चर्चा जरूर हुई है। बाकी यह तो भूमि मालिकों की सहमति पर ही निर्भर करता है कि उनके साथ पंजाब बिजली बोर्ड और मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी कैसे समन्वय बैठा पाते हैं। लेकिन तकनीकी रूप से अस्पताल भवन का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए विद्युत टावरों को शिफ्ट करना जरूरी है ताकि भविष्य में कोई भी हादसे का खतरा न रहे। 132 केवी बिजली लाइन के टावर यदि शिफ्ट होते हैं और इनके ऊपर लगी तारे पंजाब बिजली बोर्ड द्वारा यदि भूमिगत कर दी जाती है तब स्थानीय निवासियों का भी भविष्य में कोई भी हादसा होने का खतरा हमेशा के लिए टल जाएगा। इस मौके पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती, मेडिकल अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा, पंजाब बिजली बोर्ड के चीफ इंजीनियर बलविंद्र सिंह, प्रदेश बिजली बोर्ड के मुख्य अभियंता ट्रांसमिशन एमजी शर्मा और अन्य राजस्व अधिकारी भी मौजूद रहे।