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पौने तीन साल बीते, प्रशासन अपने ही परिसर में साबित नहीं कर पाया आरोप

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हमीरपुर। सरकारी तंत्र की कारगुजारी से आम जनता का विश्वास उठता जा रहा है। मिनी सचिवालय परिसर में सरकारी नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ती हैं और शहरी विकास विभाग पौने तीन वर्ष के बाद भी सबूत ही ढूंढ रहा है। इससे लगता है चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन मामले की जांच ठंडे बस्ते में पड़ गई है। मिनी सचिवालय हमीरपुर में उपायुक्त के अलावा जिला पुलिस मुख्यालय, सीआईडी व विजिलेंस समेत निर्वाचन विभाग के दफ्तर हैं। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। बावजूद इसके जिला प्रशासन को करीब तीन वर्ष बाद भी आचार संहिता उल्लंघन के सबूत नहीं मिल रहे। दिसंबर 2015 को प्रदेश मेंनगर निकाय के चुनाव की अधिसूचना जारी हुई थी। तीन वर्ष पूर्व नगर परिषद हमीरपुर के तत्कालीन अध्यक्ष दीप कुमार बजाज नगर परिषद के सरकारी वाहन में अपने समर्थकों समेत मिनी सचिवालय हमीरपुर आए और उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल किया। जिला भाजपा और उनके वार्ड नंबर दो से प्रतिद्वंद्वी वेदप्रकाश भारद्वाज ने इस मामले की शिकायत रिटर्निंग अधिकारी और उपायुक्त से की। लेकिन, जिला प्रशासन ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद मामले की शिकायत शहरी विकास विभाग शिमला में की गई। जिससे 17 अप्रैल 2018 को जांच के आदेश जारी हुए। वीरवार 18 अक्तूबर 2018 को दोबारा इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त उपायुक्त हमीरपुर के कार्यालय में हुई। जहां दोनों पक्षों के बयान कलमबद्ध हुए। करीब पौने तीन साल से चल रही इस ढील से लोगों का विश्वास उठता जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि इस तरह तो आचार संहिता का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति अपने पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा कर जाएगा और कोई कार्रवाई भी नहीं होगी। उधर, अतिरिक्त उपायुक्त हमीरपुर रतन गौतम ने कहा कि पूर्व में हुई जांच रिपोर्ट को शहरी विकास विभाग के निदेशालय भेजा गया था लेकिन, निदेशालय से दोबारा जांच के आदेश मिले हैं। वीरवार को दोनों पक्षों को बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है, शीघ्र उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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