फर्जी डीओ से सरकारी कर्मचारियों के तबादलों की कड़ी में एक ओर मामला सामने आया है।
उच्च शिक्षा निदेशालय के बाद अब तकनीकी शिक्षा निदेशालय में फर्जी डीओ (डेमी-आफिशियल) लेटर मिला।
यह मैकेनिकल इंस्टक्ट्रर वेद प्रकाश का तबादला चंबा से कांगड़ा करने के लिए बनाया गया है।
संदेह होने पर निदेशालय ने इसे पुलिस के हवाले कर दिया। यह भी उसी लेटर पैड पर है, जो सचिवालय की सीएम ब्रांच से चोरी हुआ था।
मुख्यमंत्री कार्यालय की शिकायत के बाद ही पुलिस इस केस की जांच कर रही है।
पुलिस का मानना है कि अन्य विभागों में भी ऐसे फर्जी डीओ गए हैं। चोरी हुए लेटर पैड में 36 पन्ने थे।
इनमें से अभी दो ही फर्जी डीओ ट्रेस हो पाए हैं।
इसकी एफआईआर में नामजद राकेश मेहता और संजय इस नेटवर्क में केवल मोहरे हैं।
ये एनएसयूआई और युवा कांग्रेस में पदाधिकारी रहे हैं। इनका काम तबादले के इच्छुक लोगों के साथ सौदेबाजी करना भर था।
इधर बुधवार को आरोपी राकेश मेहता और संजय से छोटा शिमला थाने में घंटों पूछताछ हुई।
आरोपियों ने माना कि लेक्चरर संजीव के तबादले को लेकर 30 हजार में सौदा तय हुआ था, लेकिन पैसों का लेन देन नहीं हुआ था।
उन्होंने उन लोगों के नाम भी पुलिस के समक्ष उगले हैं जो सचिवालय में बैठकर तबादले के फर्जी डीओ तैयार करते रहे हैं। फिलहाल दोनों आरोपी अंतरिम जमानत पर हैं।
वीरवार को पूछताछ के दौरान इसका खुलासा होगा कि क्या वेद प्रकाश ने इन दोनों आरोपियों से तबादले के लिए संपर्क किया था या वह फिर कोई और शख्स था?
इस बात की पुष्टि डीएसपी सिटी पंकज शर्मा ने की है।