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हिमाचल प्रदेश: 116 जगहों पर लगेंगे स्वचालित मौसम स्टेशन, समय रहते मिलेगी बादल फटने और बाढ़ की चेतावनी

Mon, 14 Sep 2026 02:49 PM IST
Ankesh Dogra सचिन चौधरी, धर्मशाला।

सार

हिमाचल प्रदेश में बादल फटने, भारी बारिश और अचानक बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए 116 स्थानों पर स्वचालित मौसम स्टेशन लगाए जाएंगे। परियोजना पर करीब 53 करोड़ रुपये खर्च होंगे। शिमला में सबसे अधिक 24 स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
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स्वचालित मौसम स्टेशन - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में बादल फटने, अत्यधिक बारिश और अचानक बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए मौसम निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा। प्रदेश के 116 स्थानों पर स्वचालित मौसम स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। सरकार ने इसके लिए स्थानों का चयन कर लिया है। परियोजना पर करीब 53 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

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विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वचालित मौसम स्टेशनों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर मौसम की सटीक जानकारी जुटाई जाएगी। इससे बारिश, तापमान और अन्य मौसम संबंधी बदलावों की निगरानी बेहतर होगी। मौसम की स्थिति के आधार पर लोगों को समय रहते चेतावनी जारी करने में भी मदद मिलेगी।

प्रस्तावित योजना के तहत शिमला जिले में सबसे अधिक 24 स्वचालित मौसम स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। सिरमौर में 18, चंबा और मंडी में 14-14, सोलन में 10, कांगड़ा में नौ, किन्नौर में सात, बिलासपुर में छह, ऊना में पांच, कुल्लू में चार, हमीरपुर में तीन और लाहौल-स्पीति में दो स्टेशन लगाए जाएंगे।
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इन जिलों में यहां स्थापित होंगे स्टेशन
बिलासपुर: बरोहा, निहारी, गुरु का लाहौर, कोट कहलूर, निहाल और सलोहा।
चंबा: भंजराड़ू, खड़जोटा, गरीमा, चंबा, छतराड़ी, गरनोटा, पांगी का किलाड़, लांजी, सरोल, राजपुरा, थुलेल, उलांसा, किलाड़ और चुवाड़ी।
हमीरपुर: टापरे, डूहक और सासन।
कांगड़ा: सुरवां, सिहोल, परौर, बैजनाथ, दंदेल, डांगरा, बीड़ बिलिंग, शाहपुर और बड़ोह।
किन्नौर: कटगांव, पूह, भाबा कटगांव, बोक्टू, रिब्बा, जियाबौंग और स्पिल्लो।
कुल्लू: कटरें, चौवाई, कुशवा और बंजार।
लाहौल-स्पीति: थिरोट और हुरलिंग।
मंडी: सरसकां-बरोटी, टिकरी मुशैहरा, बालू, संधोल, करसोग, शहेटाधार, नल्हास, भंगरोटू, हराबाग, जारोल, मधां, समराहन, किगस और झमार।
शिमला: नारकंडा, मंडरी, दांसा, जांगलिख, चौपाल, जुब्बल, टिक्कर, मशोबरा, ननखड़ी, कुपवी, चौपाल, दत्तनगर, बमटा, रजहाना, सुन्नी, बाहली, सराहं, गोपालपुर, खड़राला, ढल्ली, बड़ागांव, डोडरा-क्वार, शिल्लारु और अन्नू।
सिरमौर: भाइका स्याना, नारग, नाहन, शिलाई, जुब्बल चंदेश, बगथान, सनारी, क्वागधार, नोहराधार, राजगढ़, रिटाव्पल, अनाधेरी, भरोली, चारना, नोहरा, जरवा, धौलाकुआं, टिंबी और शिऊमल्ला।
सोलन: नंगल उपरला, कंडाघाट, पट्टामेहलोग, धांग, दाड़लाघाट, खटनाली, गौरा, अश्वनीखड्ड, चैल और चैल-2।
ऊना: सकौन, बडोह, बिधड़वल, सलोह और रोहड़ा बैलवल।

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स्वचालित मौसम स्टेशनों की स्थापना से प्रदेश के संवेदनशील क्षेत्रों में मौसम की निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषकर मानसून के दौरान इन स्टेशनों से मिलने वाले स्थानीय आंकड़े प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
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