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हिमाचल प्रदेश: दो दिन की बारिश में ही दरकने लगी धर्मशाला के पास चोहला की पहाड़ी

Sun, 12 Apr 2026 01:39 PM IST
Ankesh Dogra प्रवीण प्रकाश कुमार, धर्मशाला।

सार

बेमौसम बारिश के कारण धर्मशाला के समीप चोहला की पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और मिट्टी खिसककर मुख्य मार्ग पर आ पहुंचे हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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धर्मशाला से चोहला की पहाड़ी का दृश्य/दाड़नू के समीप चोहला की पहाड़ी पर भूस्खलन। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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अप्रैल माह में हुई बेमौसम बारिश ने पर्यटन नगरी धर्मशाला के समीप चोहला की पहाड़ी को असुरक्षित कर दिया है। भारी बारिश के बाद पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और मिट्टी खिसककर मुख्य मार्ग पर आ पहुंचे हैं। भू-धंसाव की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दौरान चीड़ के कई विशालकाय पेड़ भी जड़ समेत उखड़ गए हैं। बीते वर्ष मानसून के दौरान भी इसी स्थान पर भीषण भूस्खलन हुआ था, जिसमें लगभग 15 पेड़ गिरे थे। अब एक बार फिर वही स्थिति उत्पन्न होने से स्थानीय निवासियों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों कुलदीप सिंह, सुरजीत, संजय और सुनील ने कहा कि दाड़नू गांव के समीप चोहला की पहाड़ी बार-बार दरक रही है।

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प्रभावित पहाड़ी के ठीक नीचे धर्मशाला-खनियारा मुख्य मार्ग और दाड़नू-चोहला संपर्क सड़क स्थित है। लोक निर्माण विभाग ने सड़क से मलबा हटाने का प्रयास तो किया है, लेकिन मिट्टी में नमी अधिक होने के कारण पहाड़ी से बार-बार भूस्खलन हो रहा है। चोहला की यही पहाड़ी धार्मिक और साहसिक पर्यटन का केंद्र है।  यहां प्राचीन इंद्रुनाग मंदिर और पैराग्लाइडिंग टेक-ऑफ साइट स्थित है। साथ ही चोहला से भागसूनाग को जोड़ने वाली नई सड़क का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। पहाड़ी पर स्थित दर्जनों होम-स्टे, होटल और रेस्तरां हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर का हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने की भी योजना है।

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संवेदनशील क्षेत्र, विशेषज्ञों की चेतावनी
भू-गर्भीय दृष्टि से यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है। चोहला की इस पहाड़ी के ठीक सामने चरान खड्ड के पार तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का निवास स्थान है। हाल ही में धर्मशाला में 4 से 6 अप्रैल के बीच आयोजित भूकंप विषय पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने कांगड़ा को जोन-6 (अत्यधिक संवेदनशील) की श्रेणी में रखने की बात कही है। मैक्लोडगंज और चोहला की पहाड़ियों का लगातार दरकना विशेषज्ञों की उन चेतावनियों की पुष्टि कर रहा है, जिसके बाद अब इन क्षेत्रों के अस्तित्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

चोहला की पहाड़ी दरक रही है। पिछले दो दिन हुई भारी वर्षा के बाद पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और मिट्टी खिसककर मुख्य मार्ग पर आ पहुंचे हैं। लोक निर्माण विभाग की मदद से सड़क से मलबे को हटाया गया है। पहाड़ी के धंसने के कारणों का पता लगाने के लिए भू-वैज्ञानिकों से अध्ययन करवाया जाएगा। लोगों की सुरक्षा को लेकर उचित कदम उठाए जाएंगे। -हेमराज बैरवा, उपायुक्त, कांगड़ा
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